
अन्तर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस : अलवर का यह आश्रम कई असहाय बुजुर्गों का है घर, मिलती है घर जैसी सुविधाएं
पुरानी कहावत है कि जिसका कोई नहीं होता, उसकी मदद के लिए ईश्वर फरिश्ते को भेजा करते है। अलवर में भी कई असहाय, गरीब, बीमार, व बेघर लोगों के लिए फरिश्ते का कार्य कर रही है अलवर की संतोष कुमार जानकी देवी अपना घर संस्था। शहर के विवेकानंद नगर के सेक्टर 4 में स्थित यह संस्था इस समय 80 लोगों को सहारा दिए हुए है। इस आश्रम में भर्ती पीडि़तों को नि:शुल्क चिकित्सा, आवास भोजन, कपड़ा एवं अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति कर ममतामयी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती है। इस संस्था के 20 आश्रम हैं जिसमें 3 हजार से अधिक पीडि़त असहाय महिला एवं पुरुष सेवाएं ले रहे है। इनमें से 90 प्रतिशत लोग दवाईयों पर आश्रित है। यह सभी आश्रम जनसहयोग से संचालित है। इस संस्था से 1 लाख से अधिक लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सेवाओं से जुड़े हैैैै।
अलवर में 2012 में हुई शुरुआत
अपना घर आश्रम की अलवर में सन् 2012 में शुरूआत की गई। उस समय इस आश्रम में 25 लोगों के रहने की क्षमता थी। लेकिन आवासियों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए प्रथम मंजिल पर 36 लाख रुपये की लागत से 4 बड़े हॉल का निर्माण कराया। इस आश्रम की शुरूआत 17 लोगों से की गई थी। आश्रम में रह रहे आवासियों को सुबह चाय, नाश्ता, दोपहर में भोजन, इसके बाद शाम के समय फल आदि देने के बाद, रात्रि में भोजन दिया जाता है। आश्रम में आवासियों के दवाई व सेहत का खास ख्याल रखा जाता है। आश्रम में 7 हॉल व 4 कमरे है। यहां रह रहे आवासियों की नियमित जांच होती है। आश्रम में 7 लोगों का स्टाफ है जो जरूरतमंद आवासियों को नहलाने आदि का कार्य भी करते है।
यहां रहकर प्रसन्न है आवासी
बिहारीलाल सैनी
बिहारी लाल सैनी को यह संस्था 1 वर्ष पूर्व इस आश्रम में लाई थी। इनकी उम्र करीब 70 वर्ष है। बिहारी लाल सैनी बताते है कि उनके घर पर कोई नहीं था, इनके भांजे ने इनसे मारपीट कर इन्हे घर से निकाल दिया। इसमें इनकी आँख फूट गई थी, और ये सडक़ पर आ गए। कुछ दिन सडक़ पर रहने के बाद संस्था ने इनकी सुध ली और इन्हे आश्रम ले आई। यहां इनकी आँख का ऑपरेशन करवाया गया। ये अब यहां बेहद खुश है, इन्हे अच्छा भोजन मिलता है, व इनकी अच्छी तरह देखभाल की जाती है।
जयकिशन बंसल
जयकिशन बंसल 1 माह पूर्व यहां लाए गए हैं। इन्हे घर में संभालने वाला कोई नहीं है। जैसे ही संस्था को इस बात की सूचना मिली, वे तत्काल ही इन्हे आश्रम में ले आए। इन्हे पेशाब में शिकायत की बीमारी है। आश्रम इनके इलाज का सारा खर्च उठा रहा है। जयकिशन बंसल बताते हैं कि आश्रम इनका अच्छे से ख्याल रख रहा है। इसके साथ ही इन्हे नियमित रूप से चिकित्सक को भी दिखाया जा रहा है।
महेश चंद सैनी
महेश चंद सैनी को इस आश्रम में रहते हुए 1 वर्ष से अधिक का समय हो गया है। महेश चंद सैनी बताते है कि इनके मां-बाप के जाने के बाद ये अकेले हो गए, फिर इनकी पत्नी ने इन्हे छोड़ दिया। महेश चेद बताते है कि जिस समय इनका कोई नहीं था, उस समय अपना घर आश्रम ही इनका सब कुछ बना। आश्रम ने नई जिंदगी दी है।
ये है आवासियों की दशा
मनोरोगी 38
मंद बुद्धि 28
अंगहीन 1
लकवा 2
पोलियो 1
हड्डी टूटी हुई 3
मिर्गी 1
अन्य रोगी 3
Published on:
01 Oct 2018 03:25 pm
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