चुनाव मैदान में उतरे कांग्रेस एवं भाजपा प्रत्याशियों के लिए अपने दलों के बागी नेता ही नहीं, बल्कि दलों में साथ रहकर भीतरघात कर नुकसान पहुंचाने वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं की चिंता ज्यादा सता रही है।
चुनाव मैदान में उतरे कांग्रेस एवं भाजपा प्रत्याशियों के लिए अपने दलों के बागी नेता ही नहीं, बल्कि दलों में साथ रहकर भीतरघात कर नुकसान पहुंचाने वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं की चिंता ज्यादा सता रही है। इसका कारण है कि इस बार कांग्रेस व भाजपा में विभिन्न सीटों पर टिकट के दावेदारों की लंबी कतार थी।
इनमें से कुछ को पार्टी ने टिकट दिया, इससे नाराज होकर कुछ दावेदार बागी हो गए। वहीं कई टिकट के दावेदार अभी पार्टी में तो हैं लेकिन मन से साथ नहीं लग रहे या फिर पार्टी में अलग ही खिचड़ी पका रहे हैं। हालांकि पार्टी नेताओं ने ऐसे नेताओं को चिह्नित कर उन पर नजर रखना शुरू कर दिया है, लेकिन उनकी मनुहार भी जारी है।
रात भर चला मान-मनुहार का दौर
प्रत्याशियों के नाम वापसी गुरुवार दोपहर तक हो सकेगी। इस कारण कांग्रेस एवं भाजपा के रणनीतिकार एवं बड़े नेता बागी होकर निर्दलीय या किसी अन्य दल का दामन थाम चुनाव मैदान में उतरे अपने नेताओं की मान मनुहार में जुटे रहे। इन पार्टियों के स्थानीय नेताओं से लेकर प्रदेश एवं प्रभारी आदि नेताओं ने भी बागी नेताओं से फोन पर वार्ता कर समझाइश के प्रयास किए। हालांकि अभी ये ज्यादा कारगर होते दिखाई नहीं दिए।
राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधानसभा से एक नाम वापस
विधानसभा चुनाव 2023 के तहत बुधवार को राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी चन्द्रभान धानका ने अपना नाम वापस लिया है। नाम वापसी 9 नवंबर तक हो सकेगी। यह जानकारी जिला निर्वाचन अधिकारी अविचल चतुर्वेदी ने दी।
नाम वापसी के साथ ही तय हो जाएगा चुनावी मुकाबला
प्रत्याशियों के नाम वापसी के साथ ही गुरुवार को सभी 11 सीटों पर चुनावी मुकाबला भी तय हो जाएगा। संभावना है कि जिले की सभी सीटों पर कांग्रेस व भाजपा के बीच मुकाबला होना है, लेकिन बागी व तीसरे मोर्चे का दामन थाम चुनाव लड़ रहे नेताओं की कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय भी बने।