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जंगल से बस्तियों में पहुंचा भालू, एसटी-18 के ट्रैकर राजेश पर किया हमला

सरिस्का बाघ परियोजना में अप्रेल में माउंट आबू से लाए भालू को जंगल रास नहीं आ रहा है। भालू अपनी टैरटरी बनाने के चक्कर में जंगल छोड़ आबादी क्षेत्र के आसपास आ गए। गुरुवार को मढ़ा वाली ढाणी में उमरावलाल के मकान में घुसा रहने के बाद रात को वहां से निकल चतरपुरा एवं नीमूचाना में पहुंच गया।

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अलवर

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Nupur Sharma

May 06, 2023

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नारायणपुर. सरिस्का बाघ परियोजना में अप्रेल में माउंट आबू से लाए भालू को जंगल रास नहीं आ रहा है। भालू अपनी टैरटरी बनाने के चक्कर में जंगल छोड़ आबादी क्षेत्र के आसपास आ गए। गुरुवार को मढ़ा वाली ढाणी में उमरावलाल के मकान में घुसा रहने के बाद रात को वहां से निकल चतरपुरा एवं नीमूचाना में पहुंच गया। शुक्रवार सुबह बिलाली गांव से कारोली में भैरु डूंगरी के नाले में पहुंच गया। नाले में भालू ने आराम करने के बाद दोपहर करीब दो बजे डूंगरी पर चढ़ने लगा तो वनकर्मियों ने दूसरे छोर पर जाने से रोका। उसे ट्रंक्यूलाइज कर सरिस्का लाया गया।


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भालू विराटनगर सीमा में न जाकर वापस डूंगरी में गहरे गड्ढे में बैठ गया। तालवृक्ष क्षेत्रीय वन अधिकारी दलीप कुमार, घासीलाल मीणा, रामजीलाल जाट, सुरेश कुमार निगरानी व भालू का मूवमेंट बदलने में लगे रहे है। टीम दिनभर चिलचिलाती धूप में मशक्कत करती रही। रात को भी टीम की भालू पर नजर थी। एक भालू काली पहाड़ी इलाके में चला गया। उसका मूवमेंट सीरावास के जंगल की ओर होना बताया जा रहा है। भालू सरिस्का प्रशासन एवं वनकर्मियों के लिए चुनौती बना हुआ है। भालू का रास्ता बदलने के लिए तालवृक्ष रेंज की टीम के अलावा सरिस्का मुख्यालय एवं अलवर बफर से वनकर्मी बुलाए गए हैं। पावटा जयपुर से भी टीम बुलाई गई।


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कारोली भैरु डूंगरी में भालू ने टाइगर ट्रेकर राजेश एसटी 18 के पर हमला कर दिया। उसके दाएं पैर को भालू ने मुंह में दबा लिया। जिससे जाघ में गहरा घाव हो गया। जिसका नारायणपुर चिकित्सालय में उपचार किया जा रहा है। राजेश को पहले कारोली प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया गया, वहां ताला लगा हुआ मिला। उसके बाद कराणा पीएचसी पर लेकर गए। वहां भी ताला लटका हुआ मिला। उसके बाद नारायणपुर उपचार किया जा रहा है। मन्त्री को ताला लगा होने की सूचना दी गई।

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