
dahod gujarat
सुनील सिंह सिसोदिया
दाहोद (गुजरात)।
सेन्ट्रल गुजरात में विधानसभा चुनाव चरम पर है और आदिवासी वोट बैंक को साधने के लिए राजनीतिक दल रणनीति बनाने में जुटे हैं। मध्य गुजरात के हादोद, छोटा उदयपुर और पंचमहल आदिवासी बहुल जिले हैं। दाहोद की 74 फीसदी आबादी आदिवासी है। अब तक गुजरात में आदिवासी वोट बैंक को साधना किसी भी राजनीतिक दल के लिए आसान नहीं रहा है। यही वजह है कि आदिवासियों पर किसी भी एक दल का वर्चस्व नहीं रहा। भारतीय ट्राइबल पार्टी का उदय भी आदिवासियों की वजह से ही हुआ। वहीं भाजपा के मुकाबले कांग्रेस की पकड़ आदिवासियों पर मजबूत रही है। सेन्ट्रल गुजरात के आदिवासी बहुल जिले दाहोद और छोटा उदयपुर में कांग्रेस-भाजपा को अब तक बीटीपी ने कड़ी टक्कर दी है। लेकिन अब आम आदमी पार्टी ने हो ताल ठोंक दी है। प्रदेश की कुल आरक्षित सीटों में से करीब आधी 13 सीटें सेन्ट्रल गुजरात में हैं।
दाहोद के जग्गू भाई कहते हैं कि आदिवासियों को कोई भी पार्टी कम नहीं आंक सकती। आदिवासियों की वजह से किसी भी दल के चुनावी समीकरण बन-बिगड़ सकते हैं। दाहोद जिले में ही दाहोद शहर की सीट पर 1968 के बाद हुए चुनाव में मात्र तीन बार भाजपा जीत सकी है। इस सीट पर गत तीन वर्षों से कांग्रेस का कब्जा है। लेकिन इस बार कांग्रेस ने यहां नए उम्मीदवार पर दांव लगाया है। इससे भाजपा को कुछ आस जगी है। लेकिन बीटीपी और आप ने भी ताल ठोक रखी है।
भाजपा के प्रदर्शन में हो सकता सुधार
आदिवासी बहुल दादोद जिले की छह सीटों में गत चुनाव में भाजपा-कांग्रेस ने तीन-तीन सीटें अपनी झोली में डाली थी। लेकिन इस बार कांग्रेस दाहोद शहर की सीट पर प्रचार में कमजोर नजर आ रही है। वजह है कि कांग्रेस ने इस बार तीन बार के विधायक वजेसिंह पांडा का टिकट काट दिया है। यहां से हरषद भाई नीनामा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं भाजपा के कन्हैयालाल किशोरी प्रचार में उन पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। आप ने अनिल मुनिया को मैदान में उतार दिया है। इसी प्रकार कांग्रेस के वर्चस्व वाली सीट झालोद सीट पर भाजपा दम लगा रही है। गरवाड़ा पर जरूर कांग्रेस की चन्द्रिका बेन बारिया मजबूत दिख रही हैं। वहीं भाजपा ने अपने वर्चस्व वाली सीटों पर पहले ही पूरी ताकत लगा रखी है। यहां आदिवासी वोट में आप सेंध लगाकर कांग्रेस को ज्यादा नुकसान देती दिख रखी है। इसी प्रकार देवगढ़ बारिया विधानसभा सीट पर भाजपा को अपना गढ़ बचाने के लिए आप से मुकाबला करना पड़ रहा है।
भाजपा रेल इंजन कारखाना तो आप फोन पर दे रही मुफ्त योजनाओं की गांरटी
दाहोद जिला प्राकृतिक रूप से सौन्दर्य से भरपूर है। लेकिन सिंचाई के लिए ही नहीं पीने के पानी को लेकर लोगों को पेरशानी हो रही है। बताया जा रहा है कि पीने का पानी चार दिन में एक बार आता है। अभी कड़ाना और पाटा डूंगरी बांध से पानी आ रहा है। इसके अलावा पर्याप्त रोजगार के साधन नहीं होने से लोगों को दूसरे शहरों में काम के लिए जाना पड़ता है। अब प्रधानमंत्री के बिजली के रेल इंजन बनाने का कारखाना खोलने के एेलान से लोगों को कुछ रोजगार की आस जगी है। वहीं आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता आदिवासियों से पार्टी के एक मोबाइल पर फोन कराकर निःशुल्क योजनाओं का लाभ लेने के लिए गारंटी मिलने के मैसेज भिजवा रहे हैं।
2017 में एसटी-एससी आरक्षित सीटों के नतीजे
कुल सीट - 27
कांग्रेस - 15
भाजपा - 9
बीटीपी - 2
निर्दलीय - 1
Updated on:
4 Dec 2022, 9:02 PM IST
Published on:
4 Dec 2022, 9:02 PM IST
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