
पांडूपोल के करीब आएगा भर्तृहरि धाम
केंद्र व प्रदेश सरकार धार्मिक टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए तमाम प्रस्ताव लेकर आई है। धार्मिक स्थलों को जोड़कर एक कॉरिडोर बनाने का काम किया है। ठीक उसी तरह से पांडूपोल हनुमान मंदिर व भर्तृहरि धाम को नजदीक लाने की तैयारी है। वन विभाग ऐसा रास्ता तलाश रहा है ताकि श्रद्धालु एक ही दिन कुछ ही समय में दोनों स्थलों तक आसानी से पहुंच सकें। टनल का रास्ता भी तलाश जा रहा है। हालांकि ये खर्चीला है।
अलवर की पहचान धार्मिक स्थलों से भी...इस तरह तय होती है दूरी
अलवर की पहचान धार्मिक स्थलों से भी है। यहां करीब 50 से ज्यादा प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। जहां हर दिन हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं। पांडूपोल व भर्तृहरि धाम भी इसी में शामिल हैं। दोनों स्थल महत्वपूर्ण हैं। सर्वाधिक भीड़ यहां जुटती है। मेला भी लगता है, जिसमें पूरे प्रदेश से लाखों लोग आते हैं। सरिस्का िस्थत पांडूपोल हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं के लिए मंगलवार व शनिवार को खुलता है। हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। इनमें करीब 60 फीसदी श्रद्धालु उसी दिन सड़क मार्ग से भर्तृहरि धाम भी दर्शन के लिए जाते हैं। इन श्रद्धालुओं की राह और आसान हो, इसके लिए रास्ते तलाशे जा रहे हैं। मालूम हो कि करीब 22 किमी पांडूपोल से भर्तृहरि धाम की दूरी है। इस बीच अरावली पवर्तमाला पड़ती है।
कालीघाटी होगा केंद्र
पांडूपोल से कालीघाटी होते हुए ही भर्तृहरि धाम रास्ता जाता है। ऐसे में कालीघाटी ही दोनों धार्मिक स्थलों केंद्र है। यहीं से टनल का रास्ता तलाशा जा रहा है। अरावली की पहाड़ी से ही टनल निकल सकती है। ये पहाड़ी एरिया करीब 16 किमी का होगा लेकिन इस प्रक्रिया से वन्यजीव प्रभावित न हो, इस पर मंथन चल रहा है।
नाहर सती मंदिर से भी पांडूपोल तक पहुंच आसान होगी।
नाहर सती मंदिर से पांडूपोल तक श्रद्धालु आसानी से आ-जा सकें। रास्ता सुगम हो और समय की बचत हो। इसके लिए वन विभाग रोप-वे से लेकर दीवार बनाने तक का विकल्प तलाश रहा है। करीब 8 किमी दोनों के बीच दूरी है। वन विभाग का सोचना है कि यदि दीवार बनाकर वन्य जीवों को सुरक्षित कर दिया जाए तो बीच से दोपहिया व पैदल लोग निकल सकेंगे। इसका केंद्र भी कालीघाटी ही है। यदि नाहर सती मंदिर को टनल से किसी रूप में जोड़ा जाता है तो फिर दूरी और ज्यादा बढ़ जाती। खर्च हजारों करोड़ में आएगा। हालांकि टनल बनेगी तो रकम केंद्र सरकार से भी लेने की योजना है।
पांडूपोल को भर्तृहरि धाम से जोड़ने पर मंथन चल रहा है। टनल का भी सहारा लिया जा सकता है। हालांकि ये प्रस्ताव ज्यादा खर्चीला होगा लेकिन सभी विकल्प देखे जा रहे हैं। वन विभाग इसके लिए प्रस्ताव तैयार करेगा। श्रद्धालुओं को काफी आसानी होगी।
- संजय शर्मा, वन मंत्री
Published on:
22 Mar 2024 11:32 am
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