
अलवर/ पत्रिका. गूदड़ी के लाल ने कर दिया कमाल। ये पंक्तियां मुंडावर उपखंड के चिरूनी गांव के भीम सिंह के ऊपर फिट बैठती हैं। उन्होंने विपरीत हालातों का सामना करते हुए आर्मी में जगह बनाई और वहीं से चीन में चल रहे एशियन गेम में पहुंचे। जैसा उम्मीद थी भीम ने उसी पर फोकस किया। टीम के साथ रहकर नौकायन में रजत पदक पाया।
भीम के पिता छंगाराम जाट एक साधारण परिवार से आते हैं। खेती मुख्य व्यवसाय है। उसी के जरिए भीम को पढ़ाया। विपरीत परिस्थितियां भी आईं लेकिन पिता नहीं हारे। भीम की इच्छा आर्मी में जाने की थी। क्योंकि उसे अपना शौक पूरा करना था। वह नौकायन के जरिए नाम कमाना चाहते थे। जैसे ही वर्ष 2018 में आर्मी में शामिल हुए तो वहीं पर टीम बनाकर अभ्यास शुरू कर दिया। राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और फिर एशियन गेम के लिए बुलावा आ गया।
चीन में सोमवार को आयोजित हुई नौकायान प्रतियोगिता के चार सदस्य टीम के साथ भीम का प्रदर्शन बेहतरीन रहा। उन्होंने आशीष कुमार, जसविंदर सिंह और पुनीत कुमार की मदद से रजत पदक पाया। मालूम हो कि भीम के परिवार में चार भाई-बहन हैं। मां गृहणी हैं। मां दड़की देवी बेटे की इस सफलता पर फूले नहीं समा रही। भीम के पूरे गांव में जश्न का माहौल है। भीम हर किसी के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया। गांव के हर घर में भीम की प्रशंसा हो रही है। देश, प्रदेश में भीम चमक गया। परिवार के लोगों ने बताया कि भीम ने नेशनल से लेकर इंटरनेशनल पर नाम कमाया है।
Published on:
26 Sept 2023 10:48 am
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