
चतर सिंह ने नदी के पास बसाया था चतरपुरा गांव
अलवर. जिले के बानसूर कस्बान्तर्गत चतरपुरा गांव थानागाजी तहसील के गांव मुंडावरा ( ताल वृक्ष) से आए चतर सिंह शेखावत ने आकर गांव बसाया था और पंडित गोङ्क्षवद राम ने नदी के पास गांव की विक्रम संवत 1682 ज्येष्ठ शुदी तेरस को नींव लगवाई थी।
जानकारों का कहना है कि 3 वर्ष बाद गांव चतरपुरा 400 वर्ष में प्रवेश कर जाएगा। चतरपुरा में वर्तमान में राजपूत, माली, जाट बहुतायत में हैं। वैसे सभी जातियों के लोग गांव में रहते हैं। कैप्टन रघुवीर सिंह शेखावत ने बताया कि माधोराम सिंह ने गांव में दो महलों का निर्माण सन विक्रम संवत 1862 को करवाया था, जो आज खंडहर स्थिति में हंै। 1925 गांव नीमूचाना में हुए किसान आंदोलन में अलवर राजा की ओर से चलाए गए तोप के गोले के दो निशान आज भी इन महलों पर दिखाई देते हैं। क्षेत्र की सबसे अधिक मतदाता वाली ग्राम पंचायत एवं 15 हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायत में समय के साथ सुविधाओं का विस्तार हुआ है।वर्तमान में गांव में सरपंच के प्रयासों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु चिकित्सालय, राजकीय बालिका, स्कूल राजकीय माध्यमिक स्कूल सहित अन्य सुविधाएं हैं।
रोजमर्रा की चीजें आसानी से उपलब्ध हो जाती है। निजी संसाधन भी गांव में बहुतायत में है। सड$क, बिजली,पानी की व्यवस्था ठीक है। गांव में रोडवेज के अभाव में लोग निजी वाहनों में यात्रा करते हैं। किसी जमाने में गांव में सेठ रहते थे जो आज अलवर जयपुर सहित दूसरे प्रदेशों में बस गए जो बड़े व्यापारी हैं। लेकिन गांव से वर्तमान में उनका कोई नाता नहीं है। सेठों की पुरानी हवेलियां आज भी मौजूद हैं। गांव चतरपुरा निवासी वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुगन चंद्र की पत्नी मीना कुमारी 2010 से 2015 तक बानसूर पंचायत समिति प्रधान रह चुकी है।
गांव का राजकीय स्कूल आदर्श स्कूल
जिले में नामांकन वृद्धि में गांव का राजकीय माध्यमिक विद्यालय अपने आप में एक मिसाल है। विद्यालय के प्रधानाचार्य योगेश कुमार ढाचोंलिया ने ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल की दिशा और दशा बदल दी। विद्यालय शानदार लॉन सहित खेल मैदान,पेयजल की व्यवस्था सहित शौचालय बने हुए। पिछले 4 वर्षों से विद्यालय का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहता है इसका श्रेय प्रधानाचार्य सहित विद्यालय स्टाफ हो जाता है।
फसल कटाई पर भरता है मेला
ग्रामीणों ने बताया कि आज भी गांव में फसल कटाई होने पर शिवजी और हनुमानजी का मेला भरता है । वर्षों पूर्व गांव में अचानक गर्मी के मौसम में फसलों में आग लग जाती थी एवं फसल खराब हो जाती थी। इस पर ग्रामीणों द्वारा शंकर भगवान और हनुमान की पूजा करते थे जो परंपरा आज भी चली आ रही है। जहां प्रतिवर्ष मेला भरता है।
गांव में सरपंच की कमान युवा के हाथ में
दो वर्ष पूर्व हुए चुनाव में ग्रामीणों ने सरपंच की कमान करीब 30 साल बाद गांव के ग्रामीणों ने युवा सरपंच को दी है जिससे सभी गांव के लोगों को उम्मीद है। शिक्षित सरपंच नीरज तोनगरिया ने बताया कि गांव का विकास बिना भेदभाव करने और सभी को साथ लेकर चतरपुरा को एक आदर्श गांव बनाया जाएगा।
Published on:
07 Dec 2022 02:08 am
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