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मध्य गुजरात के आणंद और खेड़ा जिलों में कांग्रेस-भाजपा सीधे मुकाबले फंसी

मध्य गुजरात के दो जिले आणंद और खेड़ा में भाजपा-कांग्रेस कड़े मुकाबले में फंसे हुए हैं। यही दोनों जिले हैं मध्य गुजरात के जहां दोनों दलों के बीच सीधा मुकाबला है। आम आदमी पार्टी भी चुनौती दे रही है। आणंद और खेड़ा की कई विधानसभा सीटों पर भाजपा-कांग्रेस उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला है।

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मध्य गुजरात के आणंद और खेड़ा जिलों में कांग्रेस-भाजपा सीधे मुकाबले फंसी

kheda, gujarat

सुनील सिंह सिसोदिया

अहमदाबाद।
मध्य गुजरात के आठ जिलों के कुछ सीटों को छोड़कर ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस-भाजपा सीधे मुकाबले में नजर आ रही हैं। लेकिन आठ में से दो जिले एेसे हैं जहां कांग्रेस उम्मीदवार भाजपा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। हम बात कर रहे आणंद और खेड़ा जिले की, जहां कांग्रेस का पलड़ा पिछले चुनाव में भारी रहा। इस चुनाव में कुछ सीटों पर उलटफेर की स्थिति बन रही है, लेकिन कांग्रेस के इस गढ़ में सेंध लगाने के लिए भाजपा को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। यह दोनों ही जिले लंबे समय से कांग्रेस के लिए मजबूत रहे हैं।
आणंद में 7 और खेड़ा में 6 विधानसभा सीटें हैं। दोनों जिलों की 13 विधानसभा सीटों में से गत विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 5 और कांग्रेस ने 8 सीटों पर बाजी मारी थी। आणंद में भाजपा के 2 तो खेड़ा में 3 उम्मीदवार जीते थे। वैसे ही हालात लगभग इस चुनाव में फिर नजर आ रहे हैं। कुछ कांग्रेस के प्रभुत्व वाली सीटों पर भाजपा तो कुछ भाजपा के कब्जे वाली सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार गणित बिगाड़ रहे हैं।

पच्चीस साल बाद जीती सीट बचाने की कांग्रेस को मिल रही चुनौती
आणंद जिले को देश में श्वेत क्रांति के रूप में जाना जाता है। यहां दुग्ध उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। आणंद जिले में इस सीट पर रोचचक मुकाबला देखने को मिल रहा है। पच्चीस साल के लंबे सफर के बाद कांग्रेस ने गत विधानसभा चुनाव में यह सीट भाजपा से जीती थी। कांग्रेस के कांति सोड़ापार इस सीट पर करीब 5 हजार वोटों के अंतर से जीते थे। इस बार कांग्रेस ने उन्हें फिर उम्मीदवार बनाया है। वहीं भाजपा ने मुकाबले में योगेश परमार को उतारा है। दोनें के बीच कांटे की टक्कर बताई जा रही है। यहां यहां आप उम्मीदवार गिरीश शांडिल्य भी किस्मत आजमा रहे हैं।

मेहमदाबाद में मंत्री फंसे कड़े मुकाबले में
खेड़ा जिले की बात की जाए तो यहां भी कांग्रेस गत चुनाव में भाजपा पर भारी पड़ी थी। कांग्रेस-भाजपा में इस बार भी सीधा मुकाबला नजर आ रहा है। हालांकि कुछ सीटों पर उम्मीदवार बदलने से भाजपा के स्थानीय नेताओं में मनमुटाव भी देखने को मिल रहा है। गत चुनाव में मातर विधानसभा सीट पर भाजपा ने बाजी मारी थी, लेकिन वर्तमान विधायक केसरी सिंह सोलंकी का टिकट काटकर कल्पेश परमार को उम्मीदवार बनाया गया है। यहां पटेल को टिकट दिए जाने से क्षत्रिय वर्ग के मतदाताओं में नाराजगी का भाजपा को सामना करना पड़ रहा है। इससे भाजपा कांग्रेस से कड़े मुकाबले में फंसी नजर आ रही है।

इसी प्रकार मेहमदाबाद सीट पर भी भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला देखने को मिल रहा है। यहां भाजपा ने राज्य में मंत्री अर्जुनसिंह चौहाण को उम्मीदवार बनाया है। जीत के लिए अर्जुनसिंह को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। कांग्रेस के कब्जे वाली ठासरा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार को भाजपा से कड़ी टक्कर मिल रही है। यहां कांग्रेस को पुनः इस सीट पर कब्जा करने को लेकर पसीना बहना पड़ रहा है। अन्य सीटों पर भी कांग्रेस-भाजपा सीधे मुकाबले में फंसी हुई हैं।

त्रिकोणीय नहीं, आमने-सामने का मुकाबला
खेड़ा में चाय की थड़ी चलाने वाले कन्नूभाई कहते हैं कि अभी तो किसी का पलड़ा भारी नहीं दिख रखा। यहां जो भी जीते मुकाबला कड़ा है। विधायक का टिकट कटने से कुछ नाराजगी जरूर है। तीसरे दल के उम्मीदवार का यहां ज्यादा असर नहीं है। मुकाबला भाजपा-कांग्रेस में ही होगा।