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PhD मामले में हाईकोर्ट सख्त, कहा- जवाब नहीं दिया तो देना पड़ सकता है मुआवजा

अलवर के राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय में पीएचडी (PhD) प्रवेश प्रक्रिया को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट कहा है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर मुआवजा देने संबंधी आदेश पारित किए जा सकते हैं।

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मत्स्य विश्वविद्यालय (फोटो - पत्रिका)

राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय (RRBMU) एक बार फिर विवादों में है, और इस बार मामला सीधे पीएचडी करने वाले छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने यूनिवर्सिटी में चल रही पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही पकड़ी है। इस मामले को लेकर कोर्ट ने सख्त तेवर दिखाए हैं, जिससे यूनिवर्सिटी प्रशासन में हड़कंप मच गया है। यह पूरा मामला शोधार्थी अनिल कुमार खंडेलवाल और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर की गई याचिकाओं से जुड़ा हुआ है।

जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ में इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान खुद विश्वविद्यालय के वकील ने कोर्ट के सामने यह बात कबूल की कि पीएचडी कोर्स को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के साल 2016 के नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। यूनिवर्सिटी की इस बड़ी गलती की वजह से कई छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।

विश्वविद्यालय ने कोर्ट को भरोसा दिलाया

हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि यूनिवर्सिटी के नए वाइस चांसलर (कुलपति) इस मामले को गंभीरता से देख रहे हैं। प्रभावित छात्रों को जो भी नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई के लिए जल्द ही उचित और सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। लेकिन कोर्ट सिर्फ मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुआ।

हाईकोर्ट ने इस मामले में बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए मत्स्य यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को सीधे निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि रजिस्ट्रार खुद एक शपथ पत्र (Affidavit) कोर्ट में पेश करें। इस शपथ पत्र में उन्हें साफ-साफ बताना होगा कि इस गड़बड़ी को सुधारने और परेशान हो रहे छात्रों को राहत देने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन असल में क्या ठोस कदम उठाने जा रहा है।


16 जुलाई को अगली सुनवाई

अदालत ने अपने आदेश में यूनिवर्सिटी को चेतावनी भी दी है। कोर्ट ने कहा है कि यदि अगली सुनवाई से पहले उचित जवाब और शपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया, तो कोर्ट याचिकाकर्ता छात्रों को दिए जाने वाले मुआवजे (Compensation) की राशि खुद तय कर देगा।

यानी लापरवाही भारी पड़ने पर यूनिवर्सिटी को तगड़ा जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद अब पीड़ित छात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। अब सबकी नजरें यूनिवर्सिटी के जवाब और आने वाली 16 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।