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Alwar News: अलवर में आशा सहयोगिनियों का मिनी सचिवालय पर प्रदर्शन, काम बंद की दी चेतावनी

अलवर में अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रही आशा सहयोगिनियों का गुस्सा थम नहीं रहा है। सुनवाई न होने से नाराज आशा सहयोगिनियों ने गुरुवार को मिनी सचिवालय का घेराव किया। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक पक्का समाधान नहीं होगा, तब तक वे विरोध जारी रहेगा।
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asha sahyogini protest

विरोध-प्रदर्शन करती आशा सहयोगिनी (फोटो - पत्रिका)

अलवर जिले में स्वास्थ्य और बाल विकास सेवाओं को जमीनी स्तर पर संभालने वाली आशा सहयोगिनियों का विरोध प्रदर्शन दिन-ब-दिन और भी तेज होता जा रहा है। पिछले कई दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रही आशा सहयोगिनियों ने सुनवाई नहीं होने पर उनका धैर्य जवाब दे गया। इसी आक्रोश के चलते सैकड़ों की संख्या में एकत्रित हुई आशा सहयोगिनियों ने एक बार फिर अलवर के मिनी सचिवालय परिसर का घेराव किया और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शन कर रही आशा सहयोगिनियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मानदेय और सेवा से जुड़ी समस्याओं का कोई स्थायी और ठोस समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक वे पूरी तरह से हड़ताल पर रहेंगी और अपने सभी सरकारी कार्यों का बहिष्कार करेंगी।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सुनी समस्या

इसी प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंचे राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से भी आशा सहयोगिनियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। आशा सहयोगिनियों ने उन्हें अपने कम मानदेय, काम के अत्यधिक दबाव और दैनिक जीवन में आने वाली गंभीर समस्याओं से विस्तार से अवगत कराया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें पूर्ण भरोसा दिलाया कि वे विधानसभा सत्र के दौरान आशा सहयोगिनियों की जायज मांगों और समस्याओं के मुद्दे को सरकार के सामने बहुत मजबूती और प्रमुखता के साथ उठाएंगे।

गौरतलब है कि हाल ही में मानदेय सेवा से पृथक की गई दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, लतेश शर्मा और वंदना झांब को विभाग ने नया आदेश जारी करते हुए पुनः बहाल कर दिया है। विभाग की ओर से आदेश जारी होने के तुरंत बाद ही दोनों कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने संबंधित केंद्रों पर पहुंचकर दोबारा अपना कार्यभार संभाल लिया है।


गौरतलब है कि 18 दिनों तक चली लंबी हड़ताल के समाप्त हो जाने के बाद भी अपनी साथी कार्यकर्ताओं की बहाली और बाकी अन्य मांगों को लेकर कई कार्यकर्ता नियमित रूप से काम पर नहीं लौट रही थीं। अब दो कार्यकर्ताओं की बहाली हो जाने के बाद आंदोलनरत आशा सहयोगिनियां भी अपनी लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए पूरी तरह से आर-पार की लड़ाई के मूड में दिखाई दे रही हैं। आशा सहयोगिनियों के हड़ताल पर चले जाने की वजह से क्षेत्र में नवजात बच्चों के नियमित टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और स्वास्थ्य जांच जैसी कई अति-आवश्यक जन स्वास्थ्य सेवाएं पर असर पड़ेगा।