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बाला किला पर तोप चलाता था श्वान ‘विक्टर’

इतिहास में दर्ज है श्वान विक्टर का नामश्वान की समाधि का होगा जीर्णोद्धार

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बाला किला पर तोप चलाता था श्वान ‘विक्टर’

बाला किला पर तोप चलाता था श्वान ‘विक्टर’

अलवर. पुरातत्व व संग्रहालय विभाग के पर्यवेक्षण में बाला किला के हवा बुर्ज जाने वाले रास्ते पर स्थित श्वान विक्टर के स्मारक का संरक्षण व जीर्णोद्धार का कार्य होगा।
यहां पर क्षतिग्रस्त तोप को भी आकर्षक तरीके से डिस्प्ले कराया जाएगा। जिससे पर्यटन में इजाफा हो सकेगा व पर्यटकों को अलवर के इतिहास से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। संग्रहालयाध्यक्ष प्रतिभा यादव ने बताया कि जिला कलक्टर जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशन पर नगर विकास न्यास के सहयोग से यह कार्य करवाया जाएगा।
अलवर जिले में मौजूद बाला किले से जुड़े दस्तावेजों में विक्टर नाम के श्वान का जिक्र है। किले का निर्माण सन् 1550 में हसन खान मेवाती ने करवाया था। किले से करीब 200 मीटर पहले सडक़ के किनारे खंडहरनुमा इमारत है, जिसे तोप का कारखाना बताया जाता है। यहीं पर यह समाधि बनी हुई है। सामाजिक कार्यकर्ता चर्चित कौशिक ने इस संंबंध में अनेक बार जिला कलक्टर व पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर विक्टर की समाधि पर मरम्मत कार्य करवाने की मांग की थी।


तोप के विस्फोट में हो गई थी श्वान की मौत
पूर्व राज परिवार से जुडे नरेंद्र ङ्क्षसह ने बताया कि तोप चलाते समय आवाज बहुत तेज होती थी। इसलिए पास में पानी का कुंडा होता था। तोप में आग लगाते ही तोपची पानी में कूदता था ताकि कानों में आवाज न आए। पूर्व महाराजा जयङ्क्षसह के पास एक श्वान था। जिसका नाम लार्ड विक्टर था। महाराज अंग्रेजों ंको पसंद नहीं करते थे इसलिए अपने श्वान का नाम ही अंग्रेज के नाम पर रख दिया। उन्होंने बताया कि एक दिन एक नई तोप का परीक्षण करने के दौरान तोप फट गई तो श्वान की मौत हो गई। इस श्वान की स्मृति में ही यह समाधि बनाई गई थी। बाद में असामाजिक तत्वों ने इसे तोड़ दिया। आज भी तोप के अलग अलग हिस्से यहां पड़े हुए हैं। श्वान की समाधि भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसलिए श्वान के पत्थर को भी दूसरी जगह सुरक्षित रखा हुआ है।