
अलवर. सोडावास ग्राम पंचायत के अधीन आने वाले सोडावास कस्बा, झझारपुर, कोकावास, धौकल नगर व छापुर आदि गांवों के लोग फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर हैं। पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने यहां से लोग युवा अवस्था में प्रौढ़ नजर आने लगे हैं। इसके बावजूद भी शुद्ध पेजयल आपूर्ति के लिए कोई सरकारी प्रयास नहीं हो रहे हैं।
पानी में फ्लोराइड से ग्रमीण अंचल में कई तरह की बीमारिया फैलने का भी अंदेशा बना हुआ है। क्षेत्र के कई गांवों में फ्लोराइड के कारण लोगों को आंखों से कम दिखना, दांत गिरना, सिर के बाल सफेद होना व जोड़ों में दर्द रहना आदि कई तरह की बीमारियों ने जड़ पकड़ ली है। यहां तक कि युवा जवानी में बुढापे जैसा दिखता है। वहीं, नाईट्रेट से कैंसर तक की भी आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
लवण की मात्रा से शरीर में किडनी पर असर भी पड़ता है। सोडावास क्षेत्र व मुंडावर उपखण्ड की 43 ग्राम पंचायतों में न तो फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में आरओ प्लांट लगाए गए और ना ही अन्य पेयजल सुविधाएं दी गई हैं।
दिन-प्रतिदिन हो रहे हैं विकराल
भारत में फ्लोरोसिस सर्वप्रथम सन् 1930 के आस-पास दक्षिण भारत के राज्य आन्ध्र प्रदेश में देखा गया था। लेकिन आज भारत के विभिन्न राज्यों में यह बिमारी अपने पाँव पसार चुकी है और दिन-प्रतिदिन इसका स्वरूप विकराल ही होता चला जा रहा है।
यह देखा गया है कि अशिक्षित, गरीब व कुपोषित ग्रामीणों में फ्लोरोसिस की बीमारी बहुत ही जल्दी पनप जाती है। फ्लोरोसिस की चपेट में आकर मनुष्य असमय ही वृद्ध होने लगता है, उसकी कमर झुुकने लगती है और वह चलने-फिरने से लाचार हो जाता है।
फ्लोराइड से खतरा
फ्लोराइड पानी से दांतों व हड्डियों पर प्रभाव पड़ता है। अधिक मात्रा से आंखों व बालों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। फ्लोराइडयुक्त पानी सोडावास में होने से लोगों को संकट का सामना करना पड़ रहा है।
-डॉ. विपिन यादव, राजकीय स्वास्थ्य केंद्र, सोडावास।
फ्लोराइड पानी सोडावास क्षेत्र में होने से ग्रामीणों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। जलदाय विभाग द्वारा अब नई बोरिंग को ज्यादा गहरा कर दिया जाता है ताकि पानी में फ्लोराइड की मात्रा न हो।
-चंद्रशेखर, सहायक अभियंता, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग मुंडावर।
Updated on:
06 Jan 2018 09:06 am
Published on:
06 Jan 2018 01:15 am
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