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अलवर के मंदिरों में गूंजे देवी मां के जयकारे, शहर में इस तरह मनाई गई दुर्गाष्टमी

अलवर के मंदिरों में दुर्गाष्टमी व रामनवमी पर कई कार्यक्रम हुए। मंदिरों में मना रामजनमोत्सव, राम जन्म की गूंजी बधाइयां।

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अलवर

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Prem Pathak

Mar 26, 2018

DURGASHTAMI CELEBRATION IN ALWAR

अलवर. चैत्र मास के नवरात्र का समापन रविवार को आस्था के साथ हुआ। इस दिन श्रद्धालुओं ने अष्टमी व नवमी की ज्योत देखी और कन्याओं को भोजन कराया। महानवमी व रामनवमी एक साथ होने से हर तरफ आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ था। एक ओर देवी मंदिरों में सुबह से ही माता के दर्शनों के लिए लंबी कतार लगी, वहीं रामनवमी के चलते राम मंदिरों में राम जन्म की बधाइयां गूंजी। भजन कीर्तनों के माध्यम से भगवान राम का गुणगान किया गया।

बाला किला स्थित करणी माता मंदिर में माता के दर्शनों को सुबह से ही लंबी कतार लगी रही। जंगल में हर तरफ माता के जयकारे गूंज रहे थे। दानदाताओं ने जगह-जगह पर भंडारे व प्याऊ की व्यवस्था की। ग्रामीण क्षेत्रों के श्रद्धालु माता के लोकभजन गाते हुए यहां आ रहे थे। अनेक श्रद्धालु पैदल मंदिर तक पहुंचे।

इधर, सागर स्थित मंशा माता के मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हुआ, जो देर रात तक चलता रहा। अष्टमी व नवमी के कारण भीड़ अधिक रही। सुरक्षा के लिए पुलिस की विशेष व्यवस्था की गई। मालाखेड़ा बाजार स्थित वैष्णा माता मंदिर में पूरे बाजार को सजाया गया। यहां संगीतमय आरती हुई। बस स्टैंड स्थित चिंतपूर्णी माता का पाटोत्सव भी इस दिन मनाया गया। सुबह हवन हुआ और शाम को भक्ति संध्या का आयोजन हुआ।
रामनवमी के चलते साउथ वेस्ट ब्लॉक स्थित राममंदिर, राजर्षि अभय समाज, सहित अन्य मंदिरों में रामजन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने राम जन्म की बधाइयां गाई।

रामचरित मानस का पाठ व हवन

रामलीला क्लब तांगा स्टैंड के रंगमंच पर रामनवमी पर सुबह 11 बजे रामचरित मानस का पाठ हुआ और हवन किया गया। इसके बाद सर्वप्रथम कन्याओं को भोजन करायाा। मीडिया संयोजक हितेश ठाकुर ने बताया कि इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष मदनलाल शर्मा, निदेशक हरिकिशन खत्री, नगर परिषद सभापति अशोक खन्ना, राकेश अरोड़ा, दौलतराम हजरती, जीएल भाटिया, लीलू कथूरिया,संस्था के पूर्व अध्यक्ष व संरक्षक भीमसेन मिडडा, टेकचंद बना आदि उपस्थित थे। आर्य समाज की ओर से आर्य समाज स्वामी दयानंद मार्ग पर रामनवमी पर्व मनाया गया। प्रात: 8 बजे यज्ञ हुआ। उसके बाद भजन कीर्तन का कार्यक्रम हुआ।