
Falahari Baba को राजनीति से था गहरा लगाव, किसी को नहीं थी छूने की इजाजत, जानिए फलाहारी बाबा के अनसुने किस्से
अलवर. अलवर शहर के बहुचर्चित फलाहारी यौन शौषण मामले में आज शाम न्यायालय का फैसला आएगा। फलाहारी बाबा को साढ़े 11 बजे न्यायालय लाया गया। फलाहारी बाबा पर 7 अगस्त 2017 को बिलासपुर की युवती ने यौन शौषण का आरोप लगाया था। इसके बाद 20 सितंबर को फलाहारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। 23 सितंबर 2017 को फलाहारी को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद फलाहारी का जीवन पूरी तरह बदल गया। शहर के चर्चित मधुसूदन आश्रम का संत रामानुजाचार्य कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य फलाहारी महाराज श्रद्धालुओं के समक्ष भोजन में केवल फलाहार करने और गंगाजल पीने का हवाला देता था। करीब ढाई दशक से ज्यादा समय से अलवर में प्रवास के दौरान उन्होंने वर्षा के लिए यज्ञ सहित अनेक अनुष्ठान किए। साथ ही आश्रम के समीप ही करीब दो साल पहले श्रीवेंकटेंश तिरूपति बालाजी दिव्य धाम का निर्माण कराया। इसके अलावा शहर के समीप ही गोशाला का भी निर्माण कराया।
राजनीति से था गहरा लगाव
रामानुजाचार्य कौशलेन्द्र प्रपन्नाचार्य फलाहारी के हजारों की संख्या में श्रद्धालु हैं। इनका राजनीति से गहरा लगाव रहा है। इनके अलवर में आने के बाद ये एक भाजपा नेता के सम्पर्क में आए। इन्होंने उनके निर्दलीय विधानसभा चुनाव लडऩे पर जम कर चुनाव प्रचार किया। बाद में ये अलवर की राजनीति में रच-बस गए। इनके आश्रम में कई राजनेता नियमित रूप से आते रहे हैं।
फल ही खाता और गंगाजल पीता
कौशलेन्द्र प्रपन्नाचार्य फलाहारी के नाम के आगे फलाहारी जुड़ा हुआ है। फलाहारी बाबा जेल जाने से पूर्व गंगाजल ही पीता और फल खाता था, इसलिए उसका नाम फलाहारी बाबा पड़ा। बाबा के शिष्य देश के कई राज्यों में हैं। इनके अलवर, छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य स्थानों पर भी आश्रम हैं।
किसी को हाथ नहीं लगाता था बाबा
रामानुजाचार्य कौशलेन्द्र प्रपन्नाचार्य फलाहारी किसी भी शिष्य को छूता नहीं था। इनके हाथ में हमेशा एक डंडा रहता था। यदि किसी शिष्य को उन्हें आशीर्वाद देना होता तो वे मात्र उसके शरीर पर डंडे से स्पर्श करते थे। गुरु पूर्णिमा के दिन ही इनके पैर छू सकते थे, जबकि अन्य दिनों में शिष्यों को पैर छूने की इजाजत नहीं थी। घटना के दिन भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आश्रम आकर उनसे आशीर्वाद लिया था।
भगवान वैंकटेश का भव्य मंदिर बनवाया
कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य ने सन् 2004 में अलवर की रामकिशन कॉलोनी में मधुसूदन वेद आश्रम की स्थापना की। इस आश्रम की ख्याति कुछ ही वर्षों में जिला ही नहीं दूर दराज से तक पहुंच गई। यहां काफी संख्या में देश के विभिन्न भागों से आकर बच्चे वेद की शिक्षा ग्रहण करते हैं। यहां भगवान वैंंकटेश का भव्य मंदिर बनाया गया जिसके प्राण प्रतिष्ठा समारोह में दक्षिण भारत के काफी संतों ने भाग लिया। इस अवसर पर अलवर आध्यात्मिक नगरी के रूप में बदल गया। इस अवसर पर कई प्रदेशों के श्रद्धालुओं ने शिरकत की थी।
Published on:
26 Sept 2018 02:47 pm

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