खेती में नवाचार अपनाए तो उत्पादन अधिक मिलने के साथ आर्थिक रूप से भी किसान संपन्न होते हैं। ऐसा ही कर दिखा रहे हैं रैणी निवासी प्रगतिशील किसान अमित मीणा। अपने हुनर के बलबूते गेहूं और सरसों की अच्छी पैदावार कर लगभग बीस लाख रुपए सालाना की आय ले रहे हैं। इसके नवाचारों को देखने दूर-दूर से किसान आते हैं।
इस बार अमित ने फॉर्म पौंड योजना में बनाए गए एक टैंक और खुद की लागत से बनाए गए टैंक में बारिश का पानी रोककर लगभग दस बीघा की तलाई में सिंघाड़ा की खेती कर नवाचार किया। जो दूर दूर बिकने के लिए जा रहे हैं। बारिश के पानी के शुद्ध सिंघाड़े की मिठास ग्राहकों को मोह लेती है। किसान अमित का कहना है कि वो कुछ जमीन खुद की ओर कुछ जमीन बटाई पर लेकर खेती करते है। बारिश के पानी को रोकने के लिए अमित ने वर्ष भर कार्य योजना के तहत कार्य किया। दस बीघा में तलाई बना ली। जिसमें बारिश का पानी रोका जाता है।
इस पानी में ये सिंघाड़ा की खेती करते हैं। सिंघाड़ा की खेती होने के बाद किसान अमित लगभग सौ बीघा जमीन में गेहूं की फसल पैदा करते हैं। जिसमें लगभग सात सौ क्विंटल गेहूं और इतना ही पशु चारा पैदा करते हैं। जिसकी बाजार कीमत लगभग बीस लाख रुपए है। किसान अमित मीणा खुद उच्च माध्यमिक शिक्षा प्राप्त है। उनकी पढ़ाई को लेकर परिवार चिंतित था। अमित का पूरा परिवार राजकीय सेवा में हैं। वो खुद भी बच्चों को अच्छी पढ़ाई करवा रहे हैं। कृषि कार्य में उनकी पत्नी भी पूरा साथ देती है। नवाचार पर आधारित उनकी खेती अच्छा मुनाफा दे जाती है।