
नवविवाहिताओं के लिए खास होती है पहली होली, लेकिन इस बात की होती है मनाही, आप भी जानिए
होली खेलना हमारी परंपरा है हमारी संस्कृति है। इसलिए सभी होली खेलते हैं। होली के त्योहार का सबसे ज्यादा इंतजार होता है नवविवाहिताओं को। नवविवाहिता की पहली होली पीहर में ही मनती है। होली पर वह पीहर आती है और इसके बाद सौलह दिन की गणगौर पूजन के बाद ही वापस ससुराल जाती है। पहली होली पर ससुराल से पति , देवर, भतीजे आदि होली खेलने के लिए आते हैं और उसे रंग कर जाते हैं। अक्सर पहली होली हर विवाहिता के लिए यादगार होती है।
लोक मान्यता है कि पहली होली नवविवाहिता को अपनी सास के साथ नहीं मनानी चाहिए। इसलिए उसे पीहर भेज दिया जाता है। होलिका दहन के दिन नवविवाहिता सौलह श्रृंगार कर होलिका का पूजन करती हैं। पति व ससुराल जनों की सुख समृद्धि की कामना करती है। महिलाओं में नव नवेली विवाहिता को देखने का बड़ा क्रेज रहता है। इसके अगले दिन ससुराल वाले होली खेलने के लिए आते हैं। नवविवाहिता के अलावा उसकी बहनों व भाभियों से भी होली खेली जाती है। होली खेलने के बाद परंपरा होती है कि जवाई या उसका भाई होली खेलने वाली भाभी को मिठाई देकर आते हैं। इसी के चलते इन दिनों नवविवाहिताएं अपने पीहर आई हुई हैं। कचहरी रोड निवासी युवती आंचल गुप्ता ने बताया कि फरवरी माह में ही मेरी शादी हुई है। परंपरा के चलते मुझे पीहर भेजा गया है अब गणगौर पूजा के दौरान पहले ससुराल से सिंजारा आएगा और गणगौर पूजा के बाद मुझे ससुराल के लिए विदा किया जाएगा।
बुजुर्ग महिला यशोदा जांगिड ने बताया कि होली पर नवविवाहिता को पीहर रखने का कारण यह होता था कि उसे घर में रखकर घरेलू कामकाज भी सिखाया जाता था और ससुराल में रहने के तरीके भी बताए जाते थे। इसके साथ ही विवाहित को रिश्ते व उसमें होने वाली परेशानियों के बारे में भी समझाया जाता था।
Published on:
20 Mar 2019 11:34 am
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