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49 बच्चों पर चार शिक्षक

राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सरिस्का का है ये हालखुले आसमान के नीचे पढ़ाई करते हैं बच्चेशिक्षण कक्ष भी जर्जर स्थिति में, बारिश में टपकता है पानी

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49 बच्चों पर चार शिक्षक

49 बच्चों पर चार शिक्षक

अलवर. शिक्षा विभाग के भी खेल निराले हैं। कहीं पर बच्चों की संख्या अधिक है तो शिक्षक कम और कहीं शिक्षक अधिक तो बच्चे कम। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सरिस्का को ही लें तो यहां 49 बच्चों को पढ़ाने के लिए चार शिक्षक तैनात हैं लेकिन पढ़ाने के लिए जगह नहीं है। दो शिक्षण कक्षों में से एक में सामान भरा हुआ है। एक ही शिक्षण कक्ष है। ऐसे में बच्चों को खुले आसमान के नीचे पढ़ाया जा रहा है। बताया जाता है कि बच्चों का नामांकन भी इसी कारण कम हो रहा है।
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सरिस्का स्कूल सरिस्का के जंगलों में चल रहा है। यह स्कूल वन विभाग कार्यालय ( उप वन संरक्षण बाघ परियोजना सरिस्का ) में चल रहा है। बच्चे पढऩे के लिए इंदौक व हरिपुरा स्थित घरों से तीन से चार किमी का सफर तय करके जंगल से होकर यहां आते हैं। जंगली जानवरों का भी खतरा रहता है। इसके कारण भी बच्चे कम हो रहे हैं। यहां पंजीकृत 49 बच्चों में 25 बालक व 24 बालिकाएं हैं। गर्मियों में यहां हालात खराब होते हैं। दो कक्षों में से एक ही कक्ष बचा है जिसके नीचे बच्चे व शिक्षक अपना बचाव करते हैं। उसमें भी पानी टपकता है। यहां खतरा भी बना रहता है। लोगों का कहना है कि खुले आसमान के नीचे बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। इससे कपड़े आदि भी गंदे होते हैं। स्कूल के हाल के बारे में जिम्मेदारों को अवगत कराया गया लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
बच्चों के बैठने के पर्याप्त बंदोबस्त नहीं
यहां बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त बंदोबस्त नहीं हैं। टाट पट्टी आदि नहीं है। बच्चे जमीन पर बैठते हैं। शिक्षा विभाग ने 49 बच्चों पर चार शिक्षक तैनात किए हैं लेकिन इस सुविधा की ओर ध्यान नहीं गया है जबकि मानक हैं कि 30 बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती होगी। कई स्कूल ऐसे हैं जो एकल हैं और वहां शिक्षकों की भी आवश्यकता है।
कक्षों की मरम्मत जल्द होगी
कार्यवाहक प्रधानाध्यापक ऋषि शर्मा का कहना है कि स्कूल के शिक्षण कक्षों के बारे में विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया है। शिक्षण कक्षों की मरम्मत आदि जल्द होगी।

वर्तमान हालत की कराएंगे जांच
अलवर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी पूनम गोयल का कहना है कि समसा के अभियंता को भेजकर वर्तमान स्थिति की जांच की जाएगी। इसके बाद स्कूल भवन में मरम्मत कार्य शुरु हो जाएगा।