शिक्षा विभाग की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर लगाए जा रहे आवासीय शिक्षक प्रशिक्षण शिविर को लेकर खड़ा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
शिक्षा विभाग की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर लगाए जा रहे आवासीय शिक्षक प्रशिक्षण शिविर को लेकर खड़ा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शिविर में एक शिक्षक पर प्रतिदिन 250 रुपए से 300 रुपए खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद शिक्षक इन शिविरों में रुकने के लिए कतई तैयार नहीं है।
प्रदेश में डाइट की ओर से शिक्षकों के लिए सात- सात दिन के पूर्ण आवासीय प्रशिक्षण शिविर लगाए जा रहे हैं। शिविर के बीते सप्ताह प्रारम्भ होने के साथ ही सरकारी स्कूलों के शिक्षकों में भारी असंतोष पनप गया।
शिविरों का भारी विरोध हुआ
प्रदेश में पहले आवासीय प्रशिक्षण शिविरों का भारी विरोध हुआ जिसके चलते कई बार प्रशिक्षण शिविरों का शिक्षकों ने बहिष्कार किया। इस विरोध और असमंजस के चलते प्रदेश के अधिकतर स्थानों पर आवासीय प्रशिक्षण शिविर अपने उददेश्य में सफल नहीं हो सके।
शुरुआत से ही गम्भीर नहीं
शिविर अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो रहे हैं। इन शिविरों में सुबह 8 बजे और रात 9 बजे बायोमेट्रिक पद्धति से उपस्थिति होती है। ऐसे में शिक्षक रात को अंगूठा लगाकर वापस घर चले आते हैं।
प्रारम्भ से ही शिक्षक संघों के विरोध के चलते शिक्षक इन प्रशिक्षण शिविरों को लेकर गंभीर नहीं है। इन शिविरों में शिक्षकों को पर्यावरण, हिंदी, गणित और अंग्रेजी का प्रशिक्षण दिया जाना है।
यह कहते हैं शिक्षक नेता और अधिकारी
पंचायती राज शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष मूलचंद गुर्जर का कहना है कि इतनी गर्मी में प्रशिक्षण शिविरों को पूर्ण आवासीय करने की सार्थकता नहीं है।
इन शिविरों मेें पूरी सुविधाएं तक नहीं है, ऐसे में शिक्षक कैसे शिविरों में पूरे समय रुक सकता है।
शिक्षक संघ राष्ट्रीय के अध्यक्ष विनोद पाल यादव के अनुसार पहले शिक्षकों को आवासीय शिविर में सुविधाएं जुटानी चाहिए जिसके बाद आयोजित करने चाहिए।
जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक रोहिताश मित्तल का दावा है कि शिविर में शिक्षक पूर्ण रूप से रात में भी रह रहे हैं और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। ये शिविर अपने उद्देश्य में सफल हो रहे हैं।