
अलवर में भीषण गर्मी और तपती धूप के बीच सरिस्का टाइगर रिजर्व के बाघों ने अपनी दिनचर्या बदल ली है। इन दिनों सरिस्का के बफर जोन में बाघों की साइटिंग का एक अलग ही रोमांच देखने को मिल रहा है। गर्मी से राहत पाने के लिए बाघ और शावक वाटर पॉइंट्स का रुख कर रहे हैं, जहाँ वे पानी में अठखेलियां करते और उसके पास आराम फरमाते देखे जा रहे हैं।
ताजा आंकड़ों और वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में अलवर शहर से सटे बफर जोन के जंगलों में बाघों की हलचल बढ़ी है। बारा लिवारी के आसपास के क्षेत्रों में टाइग्रेस ST-19 और उसके चार शावकों की मौजूदगी ने पर्यटकों को रोमांचित कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी इनके पानी में नहाने और आराम करने के वीडियो वायरल हो रहे हैं। बफर रेंज के रेंजर शंकर सिंह के अनुसार, इस पूरे क्षेत्र में फिलहाल कुल 11 बाघ, टाइग्रेस और शावक सक्रिय हैं।
बफर जोन में टाइग्रेस ST-19 (बारा लिवारी), ST-2302 (बाला किला व अंधेरी क्षेत्र), ST-18 (मेल - लिवारी व आसपास का जंगल) और ST-2403 व 2404 (चूहड़सिद्ध लवकुश वाटिका) की सक्रियता दर्ज की गई है। यहां पानी के बेहतरीन इंतजामों के कारण बाघों को एक सुरक्षित वातावरण मिल रहा है, जिससे सैलानियों को भी उनके दर्शन आसानी से हो रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पूर्व एक टाइगर को रामगढ़ विषधारी भेजा गया था, जबकि ST-2405 अकबरपुर की दिशा में विचरण कर रही है।
सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्स्थापन की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों और बेहतर प्रबंधन का परिणाम है कि आज सरिस्का में बाघों और शावकों की कुल संख्या 50 से अधिक पहुंच गई है। एनसीआर क्षेत्र के करीब होने के कारण सरिस्का आज न केवल एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन गया है, बल्कि बाघों के संरक्षण के लिए एक सुरक्षित 'हॉटस्पॉट' भी बनकर उभरा है। वन विभाग ने पर्यटकों से अपील की है कि वे सफारी के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें और वन्यजीवों की शांति भंग न करें। सरिस्का की यह बढ़ती संख्या देश के वन्यजीव प्रेमियों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है।
Published on:
22 Apr 2026 04:07 pm
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