संत महापुरुषों की शरण लेकर ही सहज अवस्था प्राप्त कर सकते हैं, सहज अवस्था की प्राप्ति ही परमात्मा का मिलन कहलाता है। परमात्मा से मिलने के लिए ही गुरुबाणी के अंदर चार पड़ाव निर्देशित किए गए हैं जो की लावा के रुप में अंकित है । प्रतिवर्ष आयोजित आनंद कारज में जोडों का सामूहिक विवाह करवाया जाता है। लेकिन इस बार कोई विवाह नहीं हुआ।
50 साल पूर्व हुए विवाहित जोडें को किया सम्मानित
प्रवक्ता बसंत गांधी ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य आकर्षण 50 वर्ष पूर्व हुए आनंद कारज में विवाहित जोड़ा काशीराम गुलाटी धर्मपत्नी हरभगवान देवी को 50 वर्ष पूर्ण होने पर संतरेंन डॉ हरभजन शाह सिंघ ने स्वरूप प्रदान किया व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। आर्शीवाद देकर उनके सुखद जीवन की कामना की।कार्यक्रम स्थल पर हुई सजावट
कार्यक्रम स्थल को बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया था। सम्मेलन स्थल पर सुबह से ही लोगों का जुटना शुरु हो गया था। अलवर जिले में होने वाला यह सम्मेलन पूरे देश में विशेष पहचान रखता है। देश भर के श्रद्धालुओं की आस्था व श्रद्धा इससे जुड़ी हुई है । जिन लोगों के पूर्व में यहां विवाह हुए हैं वो भी प्रतिवर्ष यहां पर आते हैँ ओर गुरु से सुखद जीवन के लिए आर्शीवाद लेते हैं।कीर्तन सुन संगत हुई निहाल
इससे पहले कार्यक्रम की शुरूआत अलसुबह नितनेम साहिब, सुखमनी साहिब चौपाई साहिब के पाठ के साथ हुई। इसके बाद शब्द कीर्तन हुए जिसमें भाई बसंत गांधी व भाई बलजीत सिंह नामधारी ने कीर्तन कर संगत को निहाल किया। इसके बाद भाई जितेंद्र मदान ने अरदास की व प्रसाद वितरित किया गया। इसी के साथ ही तीन दिवसीय 99 वे गुरुमुख सम्मेलन का समापन हुआ।