
अलवर में अवैध खनन का खुला खेल, विधानसभा चुनावों से पहले होमगार्ड भी हटाए, खनन माफियाओं के हौसले बुलंद
जिले में अवैध खनन रोकने को लगाए होमगार्ड हटा लेने एवं विभिन्न विभागों की संयुक्त कार्रवाई थमने का ही नतीजा है कि चुनावी सीजन से पूर्व फिर अवैध खनन का खुला खेल होने लगा है। यह स्थिति तो तब है जब लोकसभा उपचुनाव के दौरान सत्तारूढ़ दल के एक विधायक खुद मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अवैध खनन पर रोक की मांग कर चुके हैं।
प्रदेश में चार महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और जिले में इससे पहले ही अवैध खनन का खुला खेल शुरू हो गया है। इन दिनों जिले में अवैध खनन किस कदर हावी हो चुका है इसका अंदाजा सडक़ों पर पत्थरों से भरे ट्रैक्टर ट्रॉली, डम्पर तथा बजरी का अवैध परिवहन करते वाहनों से लगाया जा सकता है। पिछले दिनों वन विभाग, खान व पुलिस की ओर से अलग-अलग कार्रवाई कर अनेक वाहनों को पकड़ा।
पूरे जिले में अवैध खनन का बोलबाला
इन दिनों पूरे जिले में अवैध खनन का बोलबाला है। यही कारण है कि मालाखेड़ा के सताना, बिलंदी, खैरथल में ठेकड़ा, मुण्डावर, बहरोड़, रामगढ़, राजगढ़, लक्ष्मणगढ़, तिजारा सहित अनेक स्थानों पर अवैध खनन हो रहा है। इन स्थानों पर वैध खनन कम और अवैध खनन ज्यादा हो रहा है। अब तो खैरथल स्थित पहाड़ पर अवैध खनन के लिए नए तरीके भी खोजे जा रहे हैं।
संयुक्त कार्रवाई का प्रावधान
अवैध खनन पर रोक के लिए जिला प्रशासन, पुलिस, खान, वन सहित अन्य विभागों की संयुक्त टीम को कार्रवाई के निर्देश हैं, लेकिन लंबे समय से विभिन्न विभागों की संयुक्त कार्रवाई थमी सी नजर आई। पिछले दिनों जटियाणा में एक व्यक्ति की मौत के बाद एवं सताना व बिलंदी में विभिन्न विभागों की संयुक्त कार्रवाई हुई। इसके बाद संयुक्त कार्रवाई का इंतजार है। वहीं बजरी के अवैध खनन व परिवहन को रोकने के लिए गठित एसआईटी की कार्रवाई भी अभी शुरू नहीं हो पाई है।
वन क्षेत्रों में अवैध खनन रोकने के लिए होमगार्ड के लिए जिला पुलिस अधीक्षक व जिला कलक्टर को लिखा जाएगा। पूर्व में विभाग में होमगार्ड तैनात थे, जिन्हें पिछले दिनों हटाया गया है।
आलोक गुप्ता, डीएफओ, वन मंडल अलवर।
Published on:
09 Aug 2018 09:24 am
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