
जिला परिषद अलवर
अलवर जिला परिषद सहित राज्य भर की लिपिक भर्ती में शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान अलवर की सनराइज यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। भर्ती जांच कमेटी ने जब अभ्यर्थियों की ओर से प्रस्तुत सनराइज यूनिवर्सिटी की डिग्रियों के सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय से रिकॉर्ड मांगा, तो विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से बताया गया कि वर्तमान प्रबंधन वर्ष 2021 से अस्तित्व में आया है और इससे पहले के प्रबंधन ने पुराने दस्तावेजों का अपने स्तर पर निपटान कर दिया था। ऐसे में वर्ष 2021 से पहले के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। जांच कमेटी के सामने विश्वविद्यालय की ओर से दिए गए इस जवाब के बाद उन अभ्यर्थियों की डिग्रियों के सत्यापन पर ही सवाल खड़े हो गए हैं, जिन्होंने 2021 से पहले सनराइज यूनिवर्सिटी से डिग्री हासिल कर जिला परिषदों और पंचायत समितियों में लिपिक पद पर नियुक्ति हासिल की थी।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों ने संविदा पर नौकरी करने के दौरान ही सनराइज यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर संबंधी प्रमाणपत्र अथवा शैक्षणिक योग्यता हासिल की। इन अभ्यर्थियों की नौकरी और अध्ययन की अवधि में ओवरलैप पाया गया। इस पर विश्वविद्यालय और जिला परिषद की ओर से यह तर्क दिया गया कि संबंधित अभ्यर्थियों ने संध्याकालीन कक्षाओं के माध्यम से अपनी पढ़ाई पूरी की थी, लेकिन जांच कमेटी ने जब विश्वविद्यालय से सांयकालीन कक्षाएं संचालित करने की अनुमति और उससे संबंधित रिकॉर्ड मांगा, तो विश्वविद्यालय की ओर से ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।
जांच का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह सामने आया कि सांयकालीन कक्षाओं में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों का भी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जा सका। यूनिवर्सिटी से प्राप्त डिग्रियों के आधार पर केवल अलवर ही नहीं, बल्कि राज्य के विभिन्न जिला परिषदों और पंचायत समितियों में कर्मचारी नियुक्त हुए हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय की ओर से वर्ष 2021 से पहले के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आने के बाद इन सभी नियुक्तियों में प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह यूनिवर्सिटी पूर्व में भी कथित फर्जी डिग्रियों और शैक्षणिक दस्तावेजों को लेकर विवादों में रही है। विश्वविद्यालय के संचालक की गिरफ्तारी का मामला भी सामने आ चुका है। वर्तमान में विश्वविद्यालय से संबंधित प्रकरण में थाना स्तर पर भी जांच चल रही है। अब जिला परिषद की लिपिक भर्ती जांच में वर्ष 2021 से पहले के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने, सांयकालीन कक्षाओं के संचालन से संबंधित प्रमाण नहीं मिलने और विद्यार्थियों के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के तथ्यों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
Updated on:
11 Aug 2026 11:21 am
Published on:
11 Aug 2026 11:21 am
