राजगढ़ (अलवर) . चार दशक पुराना औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई हैं। जिसके चलते फैक्ट्री मालिक अब अन्य स्थानों पर लगाने में रुचि दिखा रहे हैं। रीको औद्योगिक क्षेत्र राजगढ़ में रीको के खाली प्लाट नहीं होने के कारण नई इकाईयां नहीं लग पा रही हैं। जिसके कारण उद्योगपतियों को दौसा के बापी, बांसवाडा, उदयपुर, मकराना, रूपनगढ, गुजरात के अंबाजी में फैक्ट्री लगाने को मजबूर होना पड़ रहा हैं। राजगढ में औद्योगिक इकाईया लगाने के लिए 40 से 50 हैक्टेयर भूमि की आवश्यकता है।
राजग? के बांदीकुई मार्ग स्थित रीको औद्योगिक क्षेत्र 1984 में सरकार की ओर से बनाया गया। यहां पर करीब 80 फैक्ट्रियां चल रही है तथा कुछ फैक्ट्री बंद प?ी है। उक्त फैक्ट्रियों से करीब दो हजार लोगों को रोजगार मिल रहा हैं। राजगढ़ के इस औद्योगिक क्षेत्र से पूरे देश-विदेशों मेें भी मार्बल पाउडर, डोलोमाइट पाउडर, कैल्साइट पाउडर, चाइना क्ले भेजा जाता है। इन फैक्ट्रियों में मार्बल पाउडर, डोलोमाइट पाउडर, कैल्साइट पाउडर, चाइना क्ले का उत्पादन किया जाता है। एक माह में करीब एक लाख मीट्रिक टन पाउडर का उत्पादन किया जाता है। रोजाना यहां से करीब 100 से 125 ट्रक पाउडर भरकर बिहार, बंगाल, यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, आसाम, उत्तराखंड, उडीसा, हिमाचल, झारखण्ड व अन्य राज्यों के लिए निकलते हैं। इसके अलावा कुछ फैक्ट्रियां नेपाल, बांग्लादेश व अन्य देशों को पाउडर निर्यात करती है।
फैक्ट्रियों में पानी भर जाता है
रीको औद्योगिक क्षेत्र में बारिश के पानी के निकास की व्यवस्था नहीं होने के कारण फैक्ट्रियों में पानी भर जाता हैं। जिसकी वजह से तैयार माल खराब हो जाता है। बारिश के पानी के निकास के लिए नाला बनाया जाए। बिजली कि ट्रिपिंग भी गंभीर समस्या हैं। जिसकी वजह से फैक्ट्रियों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव प?ता है। औद्योगिक क्षेत्र में सीसी रोड के दोनों ओर मिट्टी है, जिसकी वजह से दिनभर औद्योगिक क्षेत्र में मिट्टी उ?ती रहती हैं। रीको को रोड के दोनों ओर पड़ी हुई इस मिट्टी को हटवा कर इंटरलॉक टाइल लगवानी चाहिए।
एरिया में बैंक शाखा व एटीएम नहीं होने के कारण शहर में जाना प?ता है। रीको की ओर से बनाए गए पार्कों को विकसित करने, औद्योगिक क्षेत्र में रीको का कार्यालय नहीं होने के कारण उद्योगपतियों को छोटे-छोटे कामों के लिए अलवर जाने, केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी देने के लिए रीको व जिला उद्योग केंद्र को सेमीनार आयोजित करने चाहिए। जिससे उद्योगपति ज्यादा से ज्यादा लाभांवित हो सके। पुरानी रोड लाइटों को हटवा कर नई एलईडी लाइट्स लगवाई जाएं। रीको औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों में खोदरीबा, मल्लाणा, गोवर्धनपुरा, तिलवाड, पालपुर के माइंस एरिया से कच्चा माल आता है, लेकिन आए दिन इन खानों पर सरिस्का टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट कि वजह से नए नियम लगने के कारण माइंस एरिया पर हमेशा बंद होने का खतरा बना रहता हैं। जिसके कारण रीको औद्योगिक क्षेत्र राजगढ़ का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है।
नहीं दे रहे ध्यान
एसोसिएशन अध्यक्ष गोपेश कुमार शर्मा का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में करीब 80 फैक्ट्रियां चालू है। जिनमें दो हजार से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। औद्योगिक क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण परेशानी का सामना करना पड रहा है। इस सम्बन्ध में कई बार रीको को पत्र लिखे गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। जनप्रतिनिधियों ने भी औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए कोई ध्यान नहीं दिया।
नया रीको क्षेत्र बनना आवश्यक
एसोसिएशन के जनरल सचिव राजीव जैन के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र को बने करीब चालीस वर्ष हो चुके हैं। बिजली, नाले की समस्या बनी हुई है। नया औद्योगिक क्षेत्र बनना आवश्यक है। टहला के घाट में सुरंग बननी चाहिए। जिससे कच्चा माल पर आने वाली लागत कम हो सके। समस्याओं के निराकरण की बार-बार मांग की जाती रही है।
नया औद्योगिक क्षेत्र बनाना चाहिए
उद्योगपति जयप्रकाश सैनी का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र से डोलोमाइट पाउडर भारत के अधिकांश राज्यों एवं विदेशों में भी भेजा जा रहा है। करीब दो हजार लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से नियमित हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। रीको औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार किया जाना आवश्यक है। समस्याओं के निराकरण के लिए काफी प्रयास किए गए। करीब चालीस वर्ष पहले रीको औद्योगिक क्षेत्र बनाया गया था। एरिया में एक भी प्लाट खाली नहीं है। अब सरकार को राजगढ में एक नया औद्योगिक क्षेत्र बनाना चाहिए। जिससे क्षेत्र की बेरोजगारी की समस्या कम हो जाएगी तथा क्षेत्र का विकास होगा।