
अलवर के जयसमंद बांध की सुंदरता कभी फिल्म निर्माताओं को करती थी आकर्षित, अब बदहाली के आंसू रो रहा अलवर की पहचान
अलवर. जिले का जयसमंद बांध अपनी सुंदरता के कारण कभी फिल्म निर्माताओं के लिए आकर्षण का केंद्र था। पूर्व जमाने के मशहूर फिल्म निर्माता उन्हें यहां फिल्मों की शूटिंग की थी।
लेकिन अब उपेक्षा के चलते अलवर जिले का यह प्राचीन बांध दुर्दशा का शिकार है। जयसमंद की छतरियों पर की गई कलात्मक स्थापत्यकला सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र रही है, लेकिन अब यह छतरियांं भी बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी हैं। यहां तक पहुंचने वाला सडक़ मार्ग पूरी तरह से खराब है।
आजा तुझको पुकारे मेरे गीत का हुआ था फिल्मांकन
फिल्म निर्माता वी शांताराम ने नीलकमल फिल्म की शूटिंग यहां की थी। फिल्म अभिनेता मनोज कुमार और अभिनेत्री वहीदा रहमान पर गाया गया गाना आजा तुझको पुकारे मेरे मीत इसी बांध पर फिल्माया गया था। इसके साथ दो आंखें बारह हाथ और शेरा फिल्म की शूटिंग भी जयसमंद पर ही की गई थी। अब यहां की बदहाल स्थिति को देखते हुए इस बात पर विश्वास करना मुश्किल है कि यहां कभी शूटिंग हुई होगी।
पर्यटन बढ़ाने के लिए करने होंगे प्रयास
पर्यटन स्थल के रूप में जयसमंद को उभारने के प्रयास बहुत ही कम हुए हैं। वर्तमान में यह बांध सिंचाई विभाग के अधीन है। यहां तक पहुंचने वाली सडक़ की हालत जर्जर है। यहां बना रेस्ट हाउस भी पूरी तरह से जीर्ण शीर्ण हो चुका है। लोगों ने उसके खिडक़ी दरवाजे भी उतार लिए हैं। जयसमंद बांध की पाल और छतरियां टूट-फूट कर खराब हो रही है, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं।
बल्लाना निवासी अमित कश्मीरी ने बताया कि बारिश के दिनों में यहां सडक़ पूरी तरह से पानी से भर जाती है, गड्ढे नजर नहीं आते हैं। ऐसे में पर्यटकों के साथ आए दिन हादसे भी होते हैं।
बल्लाना निवासी रजत ने बताया कि अब यहां गांव के लोग ही आना पसंद नहीं करते, शहर से लोग कैसे आएंगे। सरकार को इसकी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
1910 में बना था जयसमंद बांध
अलवर शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित जयसमंद बांध का निर्माण पूर्व महाराजा जयसिंह ने सन 1910 में करवाया था। इतिहासकार हरिशंकर गोयल ने बताया कि जयसमंद बांध आस-पास के गांव में सिंचाई करने तथा पर्यटन को बढ़ाने के लिए बनाया गया था। वर्ष 1917 में आई तेज बारिश के बाद यह बांध टूट गया । वर्ष 1924 में इसे फिर से बनाया गया। यहां पर करीब 14 छतरियां बनी हुई हुए हैं जो बहुत ही सुंदर है। 1977 में यहां सरकार की ओर से एक गेस्ट हाउस बनाया गया।
Published on:
29 Sept 2020 12:04 pm

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