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अलवर में तूफान के साए मे किए गए सफर की यह कहानी पढक़र सहम जाएंगे आप!

अलवर में तूफान के बीच किए गए इस बस के सफर को पढक़र आप सहम जाएंगे।

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अलवर

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Prem Pathak

May 04, 2018

Journey full of fear in storm in alwar

अलवर. तूफान के बीच 75 किलोमीटर का सफर खौफ के साए में 12 घंटे में पूरा हुआ। बुधवार को शाम 6.30 बजे मथुरा से अलवर के लिए रोडवेज बस में रवाना हुआ। रात करीब 8 बजे बस राजस्थान सीमा पर बहज पुलिस चौकी के पास पहुंची। अचानक बस के आगे धूल का गुबार उडऩे लगा। सडक़ पर दिखाई देना बंद हो गया। बस के ड्राइवर ने तुरंत बस को सडक़ के किनारे खड़ा कर दिया। हवा इतनी तेज थी कि मानों लगा बस पलट जाएगी। यात्री डर गए व बच्चों ने रोना शुरू कर दिया। कुछ लोग भजन गाकर भगवान को याद करने लगे। तूफान के रुकते ही एक बड़ी समस्या सामने नजर आई। सडक़ पर एक भारी पेड़ पड़ा हुआ था। उससे आगे का रास्ता बंद हो गया। एक घंटे बाद बस यात्रियों ने चिल्लाना शुरू कर दिया। हालात खराब होने पर बस को गोवर्धन लेकर जाने का फैसला लिया गया। जैसे ही बस रवाना हुई कुछ दूरी पर विद्युत की हाई टेंशन लाइन व एक पेड़ गिरा हुआ था। अब दोनों तरफ रास्ते बंद थे।

बस के यात्री डर गए। कुछ देर तक समझ नहीं आया, रात कैसे निकलेगी। पास ही बाइस रोड का निर्माण चल रहा है। ड्राइवर ने बस को उस कच्चे सडक़ पर उतार दिया। रास्ते में कहीं पेड़ गिरे मिले तो, कुछ जगहों पर विद्युत के तार पड़े हुए थे। करीब 20 से 25 किलोमीटर कच्चे मार्ग पर चलने के बाद डीग के पास सडक़ नजर आई, लेकिन सडक़ पर आते ही कई किलोमीटर लम्बा जाम नजर आया। बच्चों व लोगों का भूख से बुरा हाल था। कुछ दूरी पर एक ढाबा आया। उस पर लोगों की लम्बी कतार थी। रात दो बजे तक बस वहीं खड़ी रही। तीन बजे बाद रास्ता खुलने की सूचना मिली। किसी तरह से बस रवाना हुई, लेकिन डीग से आगे फिर रास्ते पर पेड़ गिरा हुआ नजर आया। ग्रामीणों ने मिलकर पेड़ को हटाया। सुबह 6 बजे बस नगर पहुंची। रातभर लोगों ने बस में गुजारी, बच्चों व महिलाओं को खाने के लिए कुछ नहीं मिला। शौचालय जाने में खासी दिक्कत हुई। गर्मी में बच्चों का रोक बुरा हाल था। दिन निकलते ही लगा जान बच गई।