महाराज बख्तावर सिंह को दिए थे दर्शन, तब बनवाया माता का मंदिर
अलवर. बीकानेर के देशनोक की तरह ही अलवर के बाला किला में भी करणी माता का मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर शहर के बाला किला परिसर में बना हुआ है।
इस मंदिर में साल में दो बार नवरात्र के दौरान लक्खी मेला भरता है। जिसमें नो दिनों तक भक्त दूर दूर तक दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर में करणी माता की सुंदर प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि करणी माता के दर्शनों से भक्तों की परेशानी दूर हो जाती है। पहाडियों से घिरे बाला किला में नवरात्रा के दौरान धार्मिक माहौल बना रहता है।
इतिहासकार हरीशंकर गोयल ने बताया कि करणी माता के चमत्कार से तत्कालीन महाराज बख्तावर सिंह का पेट दर्द दूर हो गया था, इसके बाद देवी की प्रतिमा किले में विराजमान करवाई गई। उन्होंने बताया कि अलवर किले में करणी माता का मंदिर महारानी रूपकंवर ने बनवाया था। एक बार महाराज बख्तावर सिंह आखेट कर रहे थे तब जंगली ***** को तीर मार दिया। इसके बाद इनके पेट में बहुत तेज दर्द हो गया। बहुत प्रयास के बाद दर्द ठीक नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने माता का ध्यान किया और करणी माता की अखंड ज्योत पर स्तुति की। महाराज के जागीरदार ने अपनी देवी का स्मरण किया और महाराज को बताया कि सफेद चील वेश में आकर माता करणी महल के दुर्ग पर दर्शन देगी। कुछ समय बाद ऐसा ही हुआ और महाराज को चील के रूप में करणी माता ने दर्शन दिए तो महाराज की पीड़ा तुरंत समाप्त हो गई। इसके बाद ही महाराज बख्तावर सिंह ने देशनोक िस्थत करणी माता के मंदिर में उम्मेदा राम जी के माध्यम से 25 हजार रुपए पूजन भेंट , एक जोडी सोने के किवाड, एक जडाऊ छत्र, एक सोने की चौकी तथा एक सोने की छडी भेंट स्वरूप् भिजवाई। इसके बाद बाला किला में करणी माता का मंदिर महारानी रूपकंवर ने बनवाया।