खोहरी हत्याकांड : लाचार मां का अफसरों से सवाल… बेटे की हत्या से तीन दिन पहले किसने काटा राशन कार्ड से नाम
अलवर. अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस कड़ी से कड़ी जोड़ती है लेकिन बेटे को न्याय दिलाने के लिए पुलिस का काम एक मां कर रही है। बहरोड़ से 60 किमी सफर करके जनसुनवाई में पहुंची लाचार मां ने अफसरों से सवाल किया कि बेटे की हत्या से तीन दिन पहले राशन कार्ड से नाम कैसे कटा ? सुनकर अफसर भी दंग रह गए। खाद्य एवं रसद विभाग के अफसर जवाब नहीं दे पाए तो मामले की गंभीरता को समझते हुए जिला कलक्टर जितेंद्र सोनी ने जांच बैठा दी है। जानकार कहते हैं, जांच निष्पक्षता से हुई तो इस लपेटे में कई आएंगे।
आरोपी गिरफ्तार, पर ठोस कार्रवाई नहीं: मां ने कहा है कि गांव के ही तीन से चार लोगों ने बेटे की मिलकर हत्या की है। उन्हें गिरफ्तार तो कर लिया गया लेकिन वह बच निकलेंगे। उसे भी खतरा नजर आ रहा है। ऐसे में ठोस कार्रवाई होगी तभी बात बनेगी।
होली के दिन खेला खूनी खेल, मां ने राशन कार्ड से जोड़ी हत्या की कडिय़ांजिला परिषद में चल रही जनसुनवाई में पहुंची बहरोड़ के खोहरी गांव निवासी संतोष देवी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा के तहत उन्हें राशन तीन फरवरी को मिला था। उसके बाद तय तिथि के अनुसार राशन लेने चार मार्च को दुकान पर गईं तो बेटे संजय उर्फ मुन्ना का नाम राशन कार्ड से गायब था। उस दौरान तो गंभीरता से नहीं लिया लेकिन ठीक तीन दिन बाद सात मार्च को गांव के मंदिर परिसर में गोलियों से संजय उर्फ मुन्ना को मार दिया। वह बेहोश हो गई। होली की खुशियां बिखर गईं। अब मां को समझ में आया कि बेटे की हत्या से तीन दिन पहले राशन कार्ड से नाम क्यों हटाया गया। उन्होंने घटना से राशन कार्ड की कडिय़ां जोड़ीं। यह काम पुलिस को करने की बजाय उन्होंने किया। आरोप है कि गोली मारने के बाद बेटा यदि अस्पताल पहुंचा तो चिरंजीवी आदि योजना के जरिए वह इलाज करवा सकता है। इलाज के पैसे उनके पास हैं नहीं। ऐसे में वह पैसे के अभाव में दम तोड़ देगा। कई अन्य कयास भी लगाए गए हैं।
नाम बिना अफसरों
या कर्मचारियों के
नहीं हट सकता
संजय की मां संतोष कहती हैं कि पति पहले चल बसे। बेटे की हत्या कर दी गई। बोली, राशन कार्ड से नाम हर कोई नहीं हटवा सकता और न जुड़वा सकता। विभाग के ही लोग ऐसा कर सकते हैं या फिर तहसील या ब्लॉक स्तरीय अधिकारी। आरोप है कि बेटे की हत्या से पहले आरोपियों ने ही इसे अंजाम दिया है। इस प्रकरण की जांच हो।