
राजस्थान के इस वीर सपूत का नक्सलियों में था खौफ, घने जंगल में ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर कई नक्सलियों को किया था ढेर
लुभावन जोशी
अलवर. नक्सलियों के गढ़ सुकमा में अलवर के वीर सपूत लक्ष्मण सिंह का अलग ही खौफ था। लक्ष्मण सिंह सीआरपीएफ में हेड कांस्टेबल पद पर तैनात थे। जहां से वे नक्सलियों पर गोलियां बरसाते थे, वह स्थान नक्सलियों के लिए लक्ष्मण रेखा बन जाती थी, नक्सली उससे आगे नहीं बढ़ पाते थे। लक्ष्मण की आवाज ऐसी बुलंद थी कि दूर से कुछ कहते, उनके साथी पहचान लेते। अलवर के सुन्दरवाड़ी गांव के लक्ष्मण सिंह जो हमेशा नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में आगे रहते थे, वे 13 मार्च 2018 को नक्सलियों की ओर से किए गए आईडी ब्लास्ट में शहीद हो गए थे।
सीआरपीएफ की 212 बटालियन में तैनात लक्ष्मण सिंह गत 10 मार्च को छुट्टी से ड्यूटी पर गए थे और 13 मार्च को उनके शहीद होने की खबर आ गई। माओवादियों से घिरे जंगल में लगातार दो वर्ष कुशलता से ड्यूटी देने उन्हें पुलिस आंतरिक सेवा पदक से सम्मानित किया गया। उनका मेडल अभी कुछ दिन पहले ही उनके घर पहुंचा है।
हर ऑपरेशन में शामिल होते थे लक्ष्मण
लक्ष्मण सिंह के भाई मांगेराम ने बताया कि लक्ष्मण सिंह नक्सलियों के खिलाफ हर ऑपरेशन में शामिल होते थे। लाल आतंक के गढ़ में उन्होंने कई नक्सलियों को ढेर किया था। लक्ष्मण अपने घर में अपने हर ऑपरेशन का अनुभव साझा करते थे। वे बताते कि घने जंगल में जहां किसी भी तरफ से गोली चल जाती थी, उस जंगल में उन्होंने कई नक्सलियों को ढेर किया। इसके साथ ही उन्होंने एक ऑपरेशन में नक्सली को जिंदा पकड़ा था। ताकत ऐसी थी कि उस नक्सली को उन्होंने एक हाथ से ही उठा दिया था।
सैनिक शहीद हुआ तो देश की सेवा करने की ठानी
शहीद लक्ष्मण सिंह ने कारगिल युद्ध में शहीद हुए उनके नजदीकी गांव निवासी शहीद वेदप्रकाश के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में देश सेवा करने की ठानी। 27 फरवरी 1981 को जन्मे लक्ष्मण ने तभी से ही अद्र्धसैनिक बल में भर्ती होने की तैयारी शुरु कर दी। इस दौरान वे एनसीसी में भर्ती हुए। एनसीसी कैडेट रहते हुए वे 15 मार्च 2001 को सीआरपीएफ में भर्ती हुए। लक्ष्मण सिंह सीआरपीएफ की ट्रेनिंग के दौरान सर्वश्रेष्ठ कैडेट चुने गए थे।
दोनों भाई भी पुलिस में
शहीद लक्ष्मण सिंह तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके दोनों बड़े भाई पुलिस में है। सबसे बड़े भाई जयसिंह रेलवे पुलिस मे हैं और मंझले भाई मांगेराम दिल्ली पुलिस में तैनात हैं। लक्ष्मण में देश की सेवा का ऐसा जज्बा था वे अपने बड़े भाई से पहले ही सीआरपीएफ में भर्ती हो गए। लक्ष्मण घर आते तो खेती-बाड़ी में हाथ बंटाते। उनका बेटा रिषभ पहली कक्षा में पढ़ रहा है और बेटी पायल छठी कक्षा में पढ़ रही है।
Updated on:
26 Jan 2019 01:53 pm
Published on:
26 Jan 2019 12:07 pm

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