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महाशिवरात्री विशेष : महाभारत काल में अर्जुन ने राजस्थान में यहां स्थापित किया था 7 फीट ऊंचा शिवलिंग, आराध्य महादेव की करते थे पूजा

Mahashivratri 2020 : महाशिवरात्री के अवसर पर आपको रुबरू कराते हैं एक ऐसे शिवलिंग से जिसकी स्थापना महाभारत काल के दौरान अर्जुन ने की थी।

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अलवर

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Lubhavan Joshi

Feb 21, 2020

Maha Shivratri : Arjun Establish Shivling At Tal Vriksh Alwar

महाशिवरात्री विशेष : महाभारत काल में अर्जुन ने राजस्थान में यहां स्थापित किया था 7 फीट ऊंचा शिवलिंग, आराध्य महादेव की करते थे पूजा

अलवर. Mahashivratri 2020 : महाशिवरात्री पर शिवालयों में श्रद्धा से पूजा होती है। राजस्थान में शिव मंदिरों का विशेष महत्व है। एक ऐतिहासिक शिव मंदिर अलवर जिले में स्थित है। जिसकी स्थापना महाभारत काल मे अर्जुन ने की थी। पांडवों ने अपने अज्ञातवास का समय विराट नगर और सरिस्का में गुजारा था। उसी समय अलवर शहर से 41 किलोमीटर दूर ताल वृक्ष में पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र छिपाए थे। यहीं अर्जुन ने अपने आराध्य शिव भगवान की पूजा की थी, कहा जाता है कि उस समय अर्जुन ने 7 फीट ऊंचे शिवलिंग की स्थापना थी। यह शिवलिंग आज भी जन-जन की आस्था का केन्द्र है। महाशिवरात्री पर इस मंदिर पर दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

सात फीट ऊंचा है शिवलिंग

यहां पर अर्जुन के अराध्य देव की सात फ ीट ऊंची शिवलिंग है। जिसे भूतेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। यह पिण्डी जिस मंदिर में स्थापित है उसके गुम्बद में अनेक देवताओ की मूर्तिया तराशी हुई हैं।

गर्म व ठण्डे पानी के कुण्ड

तालवृक्ष के मुख्य आकर्षण गर्म व ठण्डे पानी के कुण्ड हैं। पहले ये कुण्ड कच्चे थे। नारायणपुर के तत्कालीन महाराजा रामसिंह ने इनका जीर्णोद्धार करवाया था। यहां गर्म पानी के कुण्ड में स्नान करने से चर्म रोग दूर होते हैं। तालवृक्ष में राजपूत कालीन छतरियां भी हैं। जिन पर मुगल शैली के चित्र बने हुए हैं जो आज भी देखे जा सकते हैं।

यहीं छिपाए थे अस्त्र-शस्त्र

अज्ञातवास के दौरान पांडवों का ठिकाना मत्स्यनगर था, मत्स्य नगर आज अलवर के नाम से जाना जाता है। पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान तालवृक्ष पर ही अस्त्र-शस्त्र छिपाए थे। यहां ताड़ के ऊंचे-ऊंचे वृक्ष हैं, वृक्षों के ऊपर अर्जुन ने शस्त्र रखे थे। विराट युद्ध के दौरान उन्होंने यह शस्त्र यहां से उतारे थे।