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हिन्दी दिवस : जिस राजा ने Rolls Royce से साफ कराई थी शहर की सडक़ें, उसी राजा ने हिंदी को दिया था विशेष सम्मान

Maharaja Jai Singh Of Alwar : महाराजा जयसिंह ने हिन्दी को 1 शताब्दी पहले ही सम्मान दिलाया था।

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अलवर

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Lubhavan Joshi

Sep 14, 2019

Maharaja Jai Singh Of Alwar Gave Honour To Hindi Language

हिन्दी दिवस : जिस राजा ने Rolls Royce से साफ कराई थी शहर की सडक़ें, उसी राजा ने हिंदी को दिया था विशेष सम्मान

अलवर. Maharaja Jai Singh Of Alwar : हिन्दी को देश में राजभाषा का दर्जा दिलाने के लिए सरकारी एवं गैर सरकारी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अलवर में हिन्दी को एक शताब्दी पहले ही राजभाषा का दर्जा मिल गया था। वर्ष 1908 में अलवर पूर्व रियासत में तत्कालीन शासक जयसिंह ने हिन्दी लिपी में राजक ार्य करने के आदेश जारी कर हिन्दी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया था। महाराजा जयसिंह वही राजा है, जिन्होंने रॉल्स रॉयस कार से शहर की सडक़ों को साफ कराया था।

राजभाषा हिन्दी को मान दिलाने के मामले में अलवर शुरू से अग्रणी रहा है। अंग्रेजों के शासन के दौरान ही अलवर में हिन्दी को राजभाषा का दर्जा प्रदान कर दिया गया था। पूर्व राजघराने के शासक जयसिंह ने हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्थापित करने में अग्रणी पहल की।

फारसी शब्दों को दिए थे हटाने के आदेश

अलवर पूर्व रियासत ने हिन्दी को न केवल कामकाज की भाषा घोषित किया, बल्कि वर्ष 1915 में हिन्दी का मान भी बढ़ाया। पूर्व शासक ने इस दौरान हिन्दी लिपी में शामिल फारसी शब्दों को हटाने के आदेश दिए और पूरी तरह हिन्दी में राजकार्य को अनिवार्य कर दिया। उस दौरान रियासतकालीन, न्यायिक व अन्य कामकाज में पूरी तरह हिन्दी का उपयोग होने लगा। इसी प्रयास से अलवर में हिन्दी राजभाषा के रूप में स्थापित हो पाई।

गजट भी हिन्दी में ही छपवाया

अलवर पूर्व रियासत से जुड़े नरेन्द्र सिंह राठौड़ बताते हैं कि हिन्दी को राजकार्य की भाषा घोषित करने के साथ ही पूर्व शासक जयसिंह ने वर्ष 1915 में अलवर राज्य का गजट भी हिन्दी में प्रकाशित कराया। वहीं वंश पत्रावली सहित अन्य कामकाज भी हिन्दी में कराया। उनके इस प्रयास का असर है कि अलवर जिले में हिन्दी राजभाषा के रूप में बहुत पहले ही स्थापित हो चुकी है।

अलवर की रोजगार भाषा हिन्दी

एडवोकेट हरिशकंर गोयल का कहना है कि पूर्व महाराजा जयसिंह ने हिन्दी को 1908 में राजभाषा घोषित कर विकास के लिए नियम बनाए। उस दौरान निरन्तर विकास की कहानी के गजट प्रकाशित होते रहे, जिसमें जून 1931 का गजट उल्लेखनीय है। इससे पूर्व अलवर जिले में हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी भाषाओं का बोलबाला रहा। पूर्व महाराजा जयसिंह ने ही हिन्दी को रोजगार की भाषा की मान्यता दी थी। अलवर में हिन्दी खड़ी बोली, ढूंढारी, राढ़ी, मेवाती, ब्रज भाषा बोली जाती है।