
राजस्थान के लिए गर्व की बात, अपने मकराना मार्बल को ग्लोबल हैरिटेज में किया शामिल
हीरेन जोशी.
अलवर . Makranamarble In Global Heritage : चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण के साथ ही जहां अंतरिक्ष में भारत ने धमक दिखाई है। वहीं, मरुधरा की प्राकृतिक संपदा ने देश का मान बढ़ाया है। विश्व प्रसिद्ध मकराना के मार्बल ( makrana marble ) को अब दुनिया के हैरिटेज पत्थरों की सूची में शामिल किया गया है।
इंटरनेशनल यूनियन ऑफ जियोलॉजिकल साइंस (आइयूजीएस) की एग्जिक्यूटिव कमेटी ने ग्लोबल हैरिटेज स्टोन रिर्सोस के भारतीय शोध दल प्रस्ताव को मानते हुए मकराना के मार्बल को विश्व विरासत माना है। समिति की शनिवार को हुई बैठक में यह फैसला किया गया है।
वक्त के साथ बदरंग नहीं होता
मकराना मार्बल भूर्गभीय दृष्टि से पुरा केम्ब्रियन काल की कायांतरित चट्टान है। ये मूलत: चूना पत्थर के कायांतरण से बनती है। इसे लोकप्रिय रूप से संगमरमर कहते हैं। यह संगमरमर की विश्व की सबसे उत्कृष्ट श्रेणी में से एक माना जाता है। यह विशुद्ध रूप से केल्साइट मिनरल से बना होता है। भूगर्भविज्ञानी प्रो. एम.के. पंडित का कहना है कि इसमें अशुद्धिया बिल्कुल नहीं होने के कारण यह पूर्णत: धवल होता है। यह समय के साथ बदरंग नहीं होता है। यद्यपि प्रदूषण से इससे बनी इमारतों को बचाना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। मकराना में खनन का इतिहास भी पुराना है।
ताज ( taj mahal ) भी बना है इसी से
जयपुर के ( birla temple ) बिड़ला मंदिर, सिटी पैलेस के कई चौक और जालियों में भी मकराना के मार्बल का उपयोग हुआ है। आमेर किला, गोविंद देव जी मंंदिर में भी मुख्य परिसर मकराना के मार्बल का बना हुआ है। ताजमहल में भी इसी मार्बल का उपयोग किया गया है।
इन्हें माना विरासत
मकराना मार्बल, भारत
एल्पेड्रेट ग्रेनाइट, स्पेन
बाथ स्टोन, यूके
मेकिइल मार्बल, स्पेन
पिएट्रा सिरेना, इटली
रोजा बीटा ग्रेनाइट, इटली
क्या है आइयूजीएस
पृथ्वी को बचाने और भूगर्भ के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग के लिए 1961 में यह संस्था गठित की गई थी। इसका उद्देश्य पृथ्वी को बचाने के लिए प्रयास करने वाले देशों को साझा मंच उपलब्ध कराकर संस्थाओं और लोगों को प्रेरित करना है। 121 देश इसके सदस्य हैं।
यह हमारे लिए गर्व की बात- प्रो. पंडित
प्रपोजल कमेटी में पंजाब यूनिवर्सिटी की डॉ. गुरमीत कौर और उनकी टीम के साथ जयपुर के भूगर्भ विज्ञानी राजस्थान विवि के पूर्व भूगर्भशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. एम. के. पंडित शामिल थे। प्रो. पंडित ने बताया कि दो साल से इस अभियान में दल लगा हुआ था। इसके लिए टीम ने मकराना से सेम्पल लिए। पूर्ण प्रपोजल बनाकर 2018 में भेजा गया था। यह प्रपोजल बकायदा विख्यात शोधपत्र जियो हैरिटेज में प्रकाशित भी हुआ था।
प्रो. पंडित का कहना है कि मकराना का मार्बल पूरी दुनिया में पहले से ही विख्यात है। जबकि इसके बावजूद यह विश्व विरासत स्टोन में शामिल नहीं था। इसी आधार पर भारतीय दल ने विशेष तैयारी कर इसे हैरिटेज स्टोन में शामिल करने के लिए प्रयास किए थे। अब कई अन्य महत्वपूर्ण स्टोन को भी इस श्रेणी में लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। राजस्थान के धौलपुर स्टोन, जोधुपर स्टोन को भी इसमें शामिल करवाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
CM Gehlot ने किया ट्वीट
Published on:
23 Jul 2019 02:02 pm
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