
आजादी के पूर्व से संचालित मालाखेड़ा रेलवे स्टेशन विभाग की अनदेखी के कारण अपने हाल पर आंसु बहा रहा है। स्टेशन पर गिनी-चुनी ट्रेनों के ठहराव और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण इसका विकास बेपटरी हो गया है।
उत्तर-पश्चिम रेलवे के रेवाड़ी से बांदीकुई खण्ड में महत्वपूर्ण स्थान पर होने के बाद भी ट्रेनों के ठहराव की कमी के चलते व्यापारी वर्ग सहित आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लम्बी की दूरी की ट्रेनों में सफर करने के लिए यहां के लोगों को राजगढ़ या अलवर से ट्रेनों को पकडऩा पड़ता है। मालाखेड़ा से करीब 88 गांव के लोग लाभ लेते है। यहां तक कि लक्ष्मणगढ़ कस्बे के यात्री भी मालाखेड़ा रेलवे स्टेशन से यात्रा करते हैं।
इधर, स्थानीय नागरिक विष्णु शर्मा, रामबाबू शर्मा का कहना है कि हमने मालाखेड़ा रेलवे स्टेशन पर यात्रियो की परेशानियों को देखते हुए पूजा एक्सप्रेस, स्पेशल ट्रेन आदि के ठहराव के लिए रेल मण्डल प्रबंधक से मिले तथा कई बार पत्र लिखा, लेकिन विभाग ने कोई ध्यान नही दिया।
उधर, मालाखेड़ा विकास संगठन के सदस्य प्रवीण व उपेन्द्र का कहना है कि मालाखेड़ा रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था नही होने पर इस वर्ष मई माह से 20-30 लड़कों समूह बनाकर रोज रेलवे स्टेशन पहुंच यात्रियों को ठंडा पानी पिलाते हैं। मालाखेड़ा रेलवे स्टेशन पर शौचालय की माकूल व्यवस्था नहीं होने से महिला यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
रेल में माल लोडिंग कार्य बंद
मालाखेड़ा रेलवे स्टेशन से सन् 1948 से 1997 तक दी बारा क वेरी लेबर सोसायटी ब्रिकी केन्द्र मालाखेड़ा के माध्यम से रेलवे में माल लोडिंग होता था। 1997 में सोसायटी के फेल होने के बाद रेल में माल लोडिंग का कार्य बंद हो गया।
Published on:
08 Jun 2016 02:55 pm
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