
RRBMU (file photo)
राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय स्थायी शैक्षणिक और अशैक्षणिक स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। सीमित कार्मिकों के भरोसे परीक्षा, प्रायोगिक परीक्षा, परिणाम, संबद्धता सहित अन्य कार्य संचालित किए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि एक-एक कार्मिक को एक साथ तीन से चार कार्यों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
विश्वविद्यालय में वर्तमान में 30 शैक्षणिक और 27 अशैक्षणिक पद रिक्त चल रहे हैं। स्थायी स्टाफ की कमी का सीधा असर विश्वविद्यालय के रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ रहा है। विश्वविद्यालय के अधीन करीब 202 सरकारी और निजी कॉलेज हैं। इन कॉलेजों की परीक्षाओं, प्रायोगिक परीक्षाओं, मूल्यांकन, परिणाम तैयार करने, संबद्धता और परीक्षा संबंधी अन्य व्यवस्थाओं का काम विश्वविद्यालय को ही देखना होता है। ऐसे में सीमित मानव संसाधन के कारण कार्मिकों पर लगातार काम का दबाव बना रहता है।
विश्वविद्यालय में हर वर्ष पीजी पाठ्यक्रमों में करीब 300 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है। लेकिन नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए गेस्ट फैकल्टी का सहारा लिया जा रहा है। विश्वविद्यालय में अभी तक स्थायी प्रोफेसर और अन्य शिक्षकों की पर्याप्त नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं।
विश्वविद्यालय में तत्काल शैक्षणिक स्टाफ की कमी दूर करने के लिए अलवर के सरकारी कॉलेजों से शिक्षकों को डेपुटेशन पर लगाने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। इससे नियमित शिक्षकों की भर्ती होने तक विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को सहारा मिल सकता है। इसी तरह अशैक्षणिक पदों पर कार्मिकों की संख्या बढ़ने से परीक्षा और प्रशासनिक कार्यों का दबाव कम किया जा सकता है। विश्वविद्यालय अभी तक अपने नियम-कायदे तक नहीं बना पाया है। राजस्थान विश्वविद्यालय के नियमों और प्रक्रियाओं का प्रयोग किया जा रहा है।
परीक्षा और परिणाम का समय विश्वविद्यालय के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण रहता है। 200 से ज्यादा कॉलेजों के 35 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों की परीक्षा और उसका परिणाम जारी करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। स्टाफ की कमी के कारण मौजूदा कार्मिकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां आ जाती हैं। ऐसे में छोटी सी चूक भी विद्यार्थियों के परिणाम या परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
विश्वविद्यालय के गठन का उद्देश्य अलवर सहित आसपास के क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए बेहतर संस्थागत व्यवस्था तैयार करना था। लेकिन पर्याप्त स्थायी स्टाफ नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय को आज भी कई स्तरों पर अस्थायी व्यवस्थाओं का सहारा लेना पड़ रहा है। अब जरूरत इस बात की है कि रिक्त पदों पर नियमित भर्ती की प्रक्रिया जल्द पूरी हो और विश्वविद्यालय को उसके कार्यभार के अनुरूप शैक्षणिक व अशैक्षणिक मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाए।
Updated on:
13 Aug 2026 12:21 pm
Published on:
13 Aug 2026 12:21 pm
