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Rajasthan: नियुक्ति पत्र से लेकर निकाय चुनाव तक… मंत्री संजय शर्मा के धरने पर बैठने के सियासी मायने, पढ़ें Inside Story

वर्ष 2012 में भर्ती किए गए 329 सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति-पत्र नहीं देने से उठा विवाद बुधवार को सत्ता और नौकरशाही के बीच टकराव का कारण बन गया।
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अलवर

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Anil Prajapat

Aug 13, 2026

Sanjay Sharma Protest

धरने पर बैठे मंत्री संजय शर्मा। फोटो: पत्रिका

अलवर। वर्ष 2012 में भर्ती किए गए 329 सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति-पत्र नहीं देने से उठा विवाद बुधवार को सत्ता और नौकरशाही के बीच टकराव का कारण बन गया। कई दिनों से धरना दे रहे सफाई कर्मियों के समर्थन में वन राज्यमंत्री संजय शर्मा न केवल खुलकर सामने आ गए, बल्कि उन्होंने जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला और नगर निगम आयुक्त सोहन सिंह नरूका पर तीखा जुबानी हमला किया। नगर निगम में धरने पर सफाईकर्मी बैठे हुए थे, तभी मंत्री शर्मा भी उनके साथ धरने पर बैठ गए।

इस दौरान मंत्री शर्मा ने कहा कि कलक्टर आर्तिका शुक्ला, नगर निगम आयुक्त सोहन सिंह नरूका सरकार के आदेश नहीं मान रहे। सरकार के कई बार आदेश आ चुके, लेकिन दोनों किसी की बात नहीं सुन रहे। धरनास्थल पर पहुंचे आयुक्त नरूका से मंत्री शर्मा ने ने कहा कि कलक्टर यदि नियोक्ता नहीं है, तो आप तो हो। आप नियुक्ति पत्र दीजिए। कलक्टर को तो समाज का भला करना नहीं है।

मंत्री ने आयुक्त से यह भी कहा कि अधिकारियों की बात तुम नहीं मान रहे। कलक्टर और आप लोग चाहते क्या हो इस शहर से, यह बता दो। आप दोनों राज्य सरकार से बड़े हो गए क्या? या तुम ही सरकार हो? मेरी बात भी नहीं सुन रहे, झाबर सिंह खर्रा की भी नहीं सुन रहे। अब किससे कहलवाना है, यह भी बता दो। इधर, दिनभर चले इस घटनाक्रम की जानकारी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तक पहुंच गई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कलक्टर से तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दस्तावेजों की जांच कर पात्रों को नियुक्ति पत्र देने के आदेश दिए।

मंत्री के धरने से सियासी हलकों में खड़े हुए कई सवाल

लेकिन, मंत्री संजय शर्मा के धरने पर बैठने की घटना ने सियासी हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इसे महज एक लंबित नियुक्ति पत्र जारी नहीं होने के विरोध के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके पीछे अधिकारियों की कार्यशैली से नाराजगी, आगामी अलवर नगर निगम चुनाव में राजनीतिक प्रतिष्ठा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्तावित अलवर दौरे से पहले लंबित मुद्दे को सुलझाने का दबाव भी माना जा रहा है।

1. तल्खी खुलकर सामने आई

मंत्री के घर के बाहर धरने के बाद नियुक्ति पत्र जारी करने के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से नाराजी बढ़ी। अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी मंत्री की नाराजगी धरने तक पहुंचने की वजह मानी जा रही है।

2. निकाय चुनाव में प्रतिष्ठा का सवाल

अलवर नगर निगम चुनाव की हार-जीत सीधे मंत्री संजय शर्मा की राजनीतिक प्रतिष्ठा से जुड़ी है। मंत्री किसी तरह का राजनीतिक जोखिम नहीं लेना चाहते।

3. शाह के दौरे से पहले सक्रियता

मंत्री के धरने को 16 अगस्त को प्रस्तावित केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अलवर दौरे से जोड़कर भी देखा जा रहा है। दौरे से पहले लंबित मुद्दे का समाधान कराने का दबाव भी उनकी सक्रियता की एक वजह माना जा रहा है।

4. विपक्ष के हाथ से मुद्दा छीना

मंत्री के धरने पर बैठते ही विपक्ष के नेता नगर निगम पहुंचे। विपक्ष को आशंका रही कि जिस मुद्दे पर उसे आवाज उठानी चाहिए थी, उस पर मंत्री खुद आगे आ गए तो कांग्रेस पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

पहले भी कलक्टर से भिड़ चुके है संजय शर्मा

वन मंत्री संजय शर्मा पिछले वर्ष दिसंबर में सीकर में जनसेवा शिविर के निरीक्षण पर गए थे। वहां तत्कालीन कलक्टर मुकुल शर्मा के साथ अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर उनकी तीखी बहस हुई थी। मंत्री ने अधिकारियों को फटकार लगाई और कलक्टर की ओर से अधिकारियों का पक्ष लिए जाने पर नाराजगी जताई। कहासुनी के दौरान उन्होंने कागज उछालकर फेंक दिए और वहां से निकल गए थे।