
Sanjay Sharma and Govind Singh Dotasra (Photo Patrika)
अलवर। अलवर में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति के मुद्दे को लेकर अपनी ही सरकार के अफसरों के खिलाफ वन मंत्री संजय शर्मा के धरने पर बैठने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। राजस्थान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा सरकार और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था पर जोरदार हमला बोला है।
डोटासरा ने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट कर लिखा कि अगर मंत्री अपनी ही सरकार के घोटालों के खिलाफ धरने पर बैठ जाए, तो सोचिए.. सरकार में भाजपाई भ्रष्टाचार का आलम क्या है। जब मंत्री स्वयं ब्यूरोक्रेसी पर बेईमानी करने, लूटकर खाने एवं मानमानी करने जैसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं.. तो सोचिए अराजकता की स्थिति कितनी भयावह है। अलवर में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति के मुद्दे पर वन मंत्री संजय शर्मा का धरने पर बैठना एवं कलक्टर व नगर निगम आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाना भाजपा सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
भाजपा सरकार में भ्रष्टाचारी मॉडल एवं ब्यूरोक्रेसी इस कदर हावी है कि मंत्री तक की नहीं सुनी जा रही, विधायकों को कोई पूछता नहीं है, और कोर्ट के आदेश की भी परवाह नहीं होती। जिस जनतंत्र की बार-बार बात होती है, उसकी स्थिति ये है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद सफाई कर्मचारियों को कई महीनों से नियुक्ति नहीं मिल रही। वर्षों पुरानी भर्ती के अभ्यर्थी कोर्ट से जीतने के बाद भी नियुक्ति के लिए भटक रहे हैं।
डोटासरा ने कहा कि भाजपा सरकार में ब्यूरोक्रेसी इस कदर हावी है कि न तो मंत्रियों की सुनी जा रही है, न विधायकों को पूछा जा रहा है और न ही अदालत के आदेशों की परवाह की जा रही है। जिस जनतंत्र की बार-बार बात होती है, उसकी स्थिति ये है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद सफाई कर्मचारियों को कई महीनों से नियुक्ति नहीं मिल रही। वर्षों पुरानी सफाई कर्मचारी भर्ती के अभ्यर्थी कोर्ट से केस जीतने के बाद भी महीनों से नियुक्ति के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। जनता सब देख रही है। ढाई साल बाद इस अराजक भ्रष्टाचारी व्यवस्था की विदाई तय है।
दरअसल, अलवर नगर निगम में वर्ष 2012 की सफाई कर्मचारी भर्ती में चयनित 329 अभ्यर्थियों को अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिलने का मामला लंबे समय से लंबित है। अभ्यर्थियों के समर्थन में वन मंत्री संजय शर्मा बुधवार को नगर निगम परिसर में धरने पर बैठ गए।
संजय शर्मा ने कहा कि वर्ष 2012 में 329 सफाई कर्मचारियों की भर्ती हुई थी, लेकिन चयनित अभ्यर्थियों को आज तक नियुक्ति पत्र नहीं दिए गए। उन्होंने बताया कि अभ्यर्थियों के पक्ष में हाईकोर्ट का फैसला भी आ चुका है। वहीं स्वायत्त शासन विभाग भी अभ्यर्थियों को योग्य मान चुका है। इसके बावजूद स्थानीय अधिकारी पत्राचार के नाम पर मामला अटकाते रहे।
धरने के दौरान मंत्री संजय शर्मा ने जिला कलक्टर के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कलक्टर से बातचीत के दौरान उन्हें बताया गया कि नियुक्ति पत्र जारी करने वाला नियोक्ता जिला प्रशासन नहीं है। इस पर मंत्री ने कलक्टर से सरकार से बातचीत कर संबंधित नियोक्ता को निर्देश देने और अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिलाने को कहा। मंत्री ने आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है कि जिला कलक्टर और तत्कालीन नगर निगम आयुक्त की मंशा भी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की नहीं थी।
संजय शर्मा ने बताया कि पूरे मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के एसीएस अखिल अरोड़ा को भी स्वायत्त शासन विभाग का पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि DLB की ओर से भेजे गए अंतिम पत्र की जानकारी भी संबंधित अधिकारियों को दी गई है। इसके बावजूद जिला कलक्टर अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने के मामले में अडिग हैं।
Updated on:
12 Aug 2026 03:23 pm
Published on:
12 Aug 2026 03:11 pm
