
पीसीसी में कार्यकर्ताओं का जमावड़ा
राजस्थान में आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच प्रदेश कांग्रेस में सांगठनिक वर्चस्व और स्थानीय स्तर पर सियासी पकड़ को लेकर खींचतान खुलकर सतह पर आ गई है। मंगलवार को बाड़मेर और अजमेर जिलों के कई वरिष्ठ व नाराज नेता अपनी शिकायतें लेकर जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) वॉररूम पहुंचे। नेताओं ने प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से मुलाकात कर संगठन में गुटबाजी, कार्यकर्ताओं की अनदेखी और 'बाहरी दखलंदाजी' के गंभीर आरोप लगाए।
चुनावों से ठीक पहले दोनों महत्वपूर्ण जिलों में उपजे इस असंतोष ने पार्टी आलाकमान की चिंता बढ़ा दी है, हालांकि प्रदेश नेतृत्व का दावा है कि आगामी चुनाव एकजुटता के साथ लड़े जाएंगे।
बाड़मेर में कांग्रेस का अंदरूनी शक्ति संतुलन लंबे समय से बिगड़ा हुआ है। पूर्व विधायक मेवाराम जैन ने अपने समर्थकों के साथ पीसीसी चीफ से मुलाकात की और बाड़मेर में गुटबाजी खत्म करने की मांग उठाई। हालांकि मेवाराम जैन ने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा पूर्व मंत्री एवं बायतू विधायक हरीश चौधरी की तरफ माना जा रहा है।
विधानसभा चुनाव के दौरान मेवाराम जैन और लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व मंत्री अमीन खान पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई थी। आलाकमान के हस्तक्षेप पर दोनों की पार्टी में वापसी तो हो गई, लेकिन हरीश चौधरी गुट ने इसका खुलकर विरोध किया था। अब चुनावों के नजदीक आते ही यह सियासी खींचतान एक बार फिर चरम पर है।
अजमेर कांग्रेस में भी संगठनात्मक खींचतान चरम पर पहुंच गई है। अजमेर के पूर्व जिलाध्यक्ष विजय जैन ने प्रदेश नेतृत्व के सामने शिकायत दर्ज कराई कि जिले में निष्ठावान कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। विजय जैन की मौजूदा जिलाध्यक्ष राजकुमार जयपाल और आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ के साथ अनबन किसी से छिपी नहीं है। बताया जा रहा है कि जिलाध्यक्ष ने विजय जैन को कारण बताओ नोटिस भी जारी कर रखा है।
इधर, विजय जैन ने बिना नाम लिए आरोप लगाया कि अजमेर कांग्रेस के भीतर एक 'बाहरी व्यक्ति' का गैर-जरूरी हस्तक्षेप बढ़ गया है, जिससे पूरा संगठनात्मक ढांचा प्रभावित हो रहा है।
हाल ही में बांसवाड़ा के नेताओं (महेंद्रजीत सिंह मालवीय प्रकरण) की नाराजगी के बाद इस बार वॉररूम में शक्ति प्रदर्शन का तरीका बदला हुआ नजर आया। पूर्व विधायक मेवाराम जैन और उनके समर्थक पहले प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मिले, उसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के पास पहुंचे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेता संगठन के भीतर संतुलन बनाने और अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सभी बड़े धड़ों तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं।
नाराज नेताओं की बातें सुनने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कार्यकर्ताओं और नेताओं को आश्वस्त किया कि पार्टी में सभी की बात को गंभीरता से सुना जा रहा है।
डोटासरा ने कहा, "कांग्रेस एकजुट होकर और एक जाजम पर बैठकर पंचायत और निकाय चुनाव लड़ेगी। किसी भी जमीनी कार्यकर्ता के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। पार्टी में हर कार्यकर्ता को उसका वाजिब अधिकार और पूरा सम्मान मिलेगा।"
Updated on:
12 Aug 2026 12:09 pm
Published on:
12 Aug 2026 12:09 pm
