
लिपिक भर्ती 2013 में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद अब इनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है। जिला परिषद सीईओ सालुखे गौरव रविंद्र ने पांच सदस्यीय समिति गठित की है। इस समिति का अध्यक्ष बीडीओ राजगढ़ विक्रम गुर्जर को बनाया गया है। उनके साथ बीडीओ कठूमर से लेकर सहायक विकास अधिकारी व लीगल अधिकारी शामिल किए गए हैं। यह कमेटी 15 दिन में रिपोर्ट सीईओ को देगी। कमेटी के बुधवार से काम शुरू करने की संभावना है।
लिपिक भर्ती 2013 में फर्जीवाड़े का खुलासा राज्य जांच दल ने तीन दिन पहले ही किया था। दल ने पाया कि 9 साल में तीन बार की गई इस भर्ती में 655 में से 302 लिपिक संदिग्ध हैं। यानी 48 फीसदी लिपिक फर्जी तरीके से नौकरी पर लगे हैं। जांच टीम ने यह रिपोर्ट सरकार को भेजी, तो बड़े अफसर भी दंग रह गए। उन्होंने जिला कलक्टर व जिला परिषद सीईओ को आदेश दिए हैं कि इन 302 लिपिकों की सुनवाई 15 दिन में करते हुए बर्खास्त किया जाए।
इस प्रक्रिया में शामिल 200 से अधिक अधिकारी व कार्मिकों के खिलाफ भी तीन सप्ताह में एक्शन लेकर रिपोर्ट सरकार को भेजें। जांच दल ने यह भी कहा है कि इस भर्ती प्रक्रिया में जिला स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक के अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। भर्ती के दौरान जो भी जिला कलक्टर रहे हैं, उनसे स्पष्टीकरण लिया जाए। 18 कार्मिकों पर केस दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं। इस आदेश के बाद जिला कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने सीईओ को 7 दिन में कार्रवाई करने के आदेश दिए। उसी कड़ी में सीईओ ने जांच कमेटी बनाई है।
राजस्थान पत्रिका ने लिपिक भर्ती में हुए फर्जीवाड़े का खुलासा सबसे पहले किया। यहां से एक के बाद एक केस सामने आया, तो प्रदेश के अन्य जिलों में सरकार ने जांच के आदेश जिला कलक्टर्स को दिए। उसके बाद प्रदेश स्तरीय जांच शुरू हुई। जयपुर, भरतपुर की जांच के बाद अलवर की रिपोर्ट सामने आई और यहां सबसे पहले एक्शन कमेटी बनाई गई है।
लिपिक भर्ती को लेकर सरकार की ओर से दिए गए आदेशों की पालना में कमेटी बना दी गई है, जो अपनी रिपोर्ट 15 दिन में देगी। इस अवधि में सभी संदिग्ध अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच कर एक्शन लेना है - सालुखे गौरव रविंद्र, सीईओ, जिला परिषद
Updated on:
12 Aug 2026 01:31 pm
Published on:
12 Aug 2026 01:31 pm
