
Mee Too अभियान पर अलवर की महिलाओं ने दी अपनी राय, कह डाली यह बात, आप भी जानिए
अलवर. पश्चिम देशों से शुरु हुआ मी टू अभियान अब भारत में भी काफी पॉपुलर हो रहा है। भारत की वो महिलाएं जो कार्यस्थल पर किसी ना किसी से यौन शोषण से प्रताडित रही है । उन्होंने सोशल मीडिया को अपना सहारा बनाकर उन लोगों के बेनकाब कर दिया है जो देश में बड़े पदों पर आसीन हैं। गलत कौन है या सही कौन है इसका फैसला अभी बाकी है। लेकिन इन महिलाओं के हौंसलों को देखकर लगता है कि ये अब पीछे हटने वाली नहीं है। मी टू पर देश में बहस छिडी हुई है। कुछ महिलाएं ऐसी भी है जो पुरुषों के पक्ष में सामने आई हैं।
पिछले काफी समय से महिलाएं अपने साथ काम करने वाले व्यक्तियों के साथ प्रताडित होती आई हैं। इसकी वजह से उन्हें घूट घूटकर जीना पड़ रहा है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा मी टू अभियान से पीडित महिलाओं को एक मंच मिल गया है। दवाब की वजह से ही अब मंत्री एमजे अकबर को स्तीफा देना पड़ गया। आगे और भी ऐसे मामले सामने आएंगे जब पुरुषों को माफी मांगनी होगी।
डिम्पल मिश्रा, छात्रसंघ अध्यक्ष
मीटू अभियान में अभी तक कई चॢचत चेहरे सामने आ चुके हैं। ये वो लोग है जिनकी समाज में अच्छी छवि हैं। लेकिन अब हकीकम सामने आई तो यह सब इससे साबित हो रहा है कि महिलाओं को आगे बढऩे के लिए किस तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती है। लेकिन अब समय बदल गया है अब महिलाओं का समय आ गया है। अब जितना दुख और पीडा महिलाओं को भोगनी होगी उतनी ही पुरुष को भी भोगनी होगी।
रूचि खंडेलवाल, स्कूल प्राचार्य
लगता है कि अक्टूबर का महिना महिलाओं के लिए बड़ा शुभ है। एक महिला ने सोशल मीडिया पर जो अपने खिलाफ हुए गलत काम के लिए आवाज उठाई तो देश में तहलका मच गया । जो महिलाएं वर्षो से अपने साथ हुए अन्याय को दबाकर बैठी थी आज वो खुलकर बोल रही हैं । इससे समझना चाहिए कि महिलाएं अब ज्यादा बर्दाश्त करने वाली नहीं है ।
निशा शर्मा, आर आर कॉलेज स्टूडेंट
लगता है कि अक्टूबर का महिना महिलाओं के लिए बड़ा शुभ है। एक महिला ने सोशल मीडिया पर जो अपने खिलाफ हुए गलत काम के लिए आवाज उठाई तो देश में तहलका मच गया । जो महिलाएं वर्षो से अपने साथ हुए अन्याय को दबाकर बैठी थी आज वो खुलकर बोल रही हैं । इससे समझना चाहिए कि महिलाएं अब ज्यादा बर्दाश्त करने वाली नहीं है ।
निशा शर्मा, आर आर कॉलेज स्टूडेंट
आखिर कब तक घर के अंदर व बाहर महिलाएं इसी तरह से पीडि़त होती रहेंगी। उनको कहीं तो सुरक्षा मिलनी ही चाहिए। मीटू अभियान महिलाओं की आवाज बना है। इस मंच पर महिलाएं अपनी आप बीती खुलकर बता रही है। वो बातें जो आज तक सबसे छुपाई वो सोशल मीडिया पर शेयर हो रही है। लेकिन ऐसा ना हो की बेवजह महिलाएं किसी को परेशान करने के लिए इसका इस्तेमाल करें। -
आशा, कॉलेज छात्रा
Published on:
23 Oct 2018 10:52 am
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