
गोविंदगढ़. सीमित भूमि होने के कारण खेती को परिवार के पालन-पोषण में लाभकारी नहीं मानने की धारणा को गोविंदगढ़ क्षेत्र के सैदमपुर बास गांव की मंजू लता ने बदल कर रख दिया है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने आधुनिक खेती को अपनाकर न केवल अच्छी आमदनी हासिल की, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल भी पेश की है।
मंजू लता के पास मात्र 1.5 बीघा भूमि है। परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने आधुनिक पद्धति से गोभी की खेती शुरू की। इस कार्य में उन्हें एक संस्था का सहयोग भी मिला। संस्था की ओर से दिए गए प्रशिक्षण और नियमित मार्गदर्शन के बाद उसने वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन किया। समय पर देखरेख और उचित तकनीक के कारण गोभी की फसल का उत्पादन बेहतर रहा।मंडी में गोभी के 30 से 35 रुपए प्रति किलो के भाव
फसल तैयार होनेे पर मंडी में गोभी 30 से 35 रुपए प्रति किलो के भाव से बिकी। इस एक फसल से मंजू लता को लगभग 70 हजार रुपए की आमदनी हुई। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया और स्वयं व परिवार का भी आत्मविश्वास बढ़ा है।तकनीकी मार्गदर्शन से बदली तस्वीर
इब्तिदा संस्था से जुड़े मूलचंद ने बताया कि यदि किसानों को सही तकनीकी जानकारी, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले, तो कम भूमि में भी अच्छा उत्पादन और बेहतर आय हासिल कर सकते हैं। मंजू लता इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। जिसने यह कर दिखाया है। वर्तमान में मंजू लता दोबारा गोभी की खेती कर रही हैं और आगे अन्य सब्जियों की खेती करने की योजना बना रही हैं। उसकी सफलता से गांव की अन्य महिलाएं और किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि सकारात्मक सोच, मेहनत और सही सहयोग से ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक सशक्तीकरण की मजबूत आधारशिला रख सकती हैं।
Updated on:
09 Feb 2026 12:34 am
Published on:
09 Feb 2026 12:34 am
