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सरसों की लहलहा रही फसल… पर इसे देख किसानों की बढ़ी चिंता…देखे वीडियो

राजस्थान के अलवर जिले में सरसों की फसल लहलहा रही है। सडक़ों से गुजरते वाहनों व ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों की जहां तक नजर पड़ती, दूर-दूर तक पीली चादर ओढ़े धरा नजर आती है, लेकिन इस लहलहाती फसल में चेपा रोग लगने व बादल छाए रहने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

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अकबरपुर. तापमान में उतार-चढ़ाव व छितराए बादल छाए रहने सरसों, चने की फसल में चेपा कीट लगने की संभावना बनी हुई है। इससे किसान चिंतित नजर आ रहे हैं।

किसानों का कहना है कि रबि की फसल सरसों व चने में तापमान के बदलाव का गहरा असर पड़ता है। तेज सर्दी व ओस गिरने से जहां पाला जमने का डर लगा रहता है, वहीं बादल छाए रहने से सरसों में चेपा तथा चने में लट लगने की संभावना बढ़ जाती है। किसान रमेश आदि ने बताया कि जिन किसानों ने अगेती सरसों की फसल की बुवाई की थी, उसमें पानी भी पिलाया जा चुका है। अगेती सरसों की फसल में फूल आकर अब झडऩा शुरू हो गए है और फली आने लगी है। हालांकि किसान इसमें पानी समय पर देने का प्रयास कर रहे हैं। फली पकने लगी है और दाना बनने लगा है, लेकिन इन दिनों तापक्रम घटता व बढ़ता रहता है। जिससे कीट, मच्छरों का पनपना प्रारंभ हो जाता है। फसल में कीट और मच्छरों का प्रकोप बढऩे का डर लगा रहता है। साधारण भाषा में चेपा (मऊ ) बोला जाता है। इसका बचाव का भी किसान ध्यान रख रहे हैं। इधर कृषि अधिकारियों का कहना है कि कीट प्रकोप नजर आए तो रासायनिक का छिडक़ाव करें। अगर पाला पडऩे का डर रहे तो शाम को किसान खेतों की ढोल पर धुआं करें।


दवा का करें छिडक़ाव
कृषि पर्यवेक्षक अर्चना बुनकर का कहना है कि इस समय सरसों की फसल फूल (फ्लावरिग) की अवस्था में है। जिसमें कीटों का प्रकोप होने की संभावना अधिक होती है। इससे बचाव के लिए किसान क्यूना फोस आदि दवा का प्रयोग करें। पाल से बचाव के लिए 0.2त्न डामिथाइल सल्फोक्साइड या 0.1 त्न तनु गंडक का छिडक़ाव करें या शाम के समय फसल में हल्के फव्वारे से सिंचाई करें।