17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

देश-विदेशों तक है अलवर के असलम भारती की कव्वाली की पहचान, गायन में पाई ख्याती

अलवर के कव्वाल असलम भारती की पहचान अब देश-विदेशों तक है, असलम भारती अब अलवर के सदस्य बन गए हैं।

2 min read
Google source verification

अलवर

image

Prem Pathak

May 03, 2018

Name of aslam khan becoming famous in world

कला उम्र और परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती है। ऐसे ही हैं अलवर के ख्याति नाम कव्वाल असलम भारती, जिन्होंने अपनी कव्वाली के दम पर अपनी पहचान देश-विदेशों में बनाई है। असलम भारती का जन्म 1956 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हुआ। 1996 में अलवर आकर बस गए और चहीं के होकर रह गए। इन्हें बचपन से ही गाने का शौक था। इनके पिता नजीर अहमद ने इन्हें गाना सिखाया। अलवर में इन्हें गायन के क्षेत्र में ख्यातिनाम भपंग वादक जहूर खां लेकर आए और उन्होंने इनको मंच प्रदान किया। बाद में ये जहूर खां के पुत्र उमर फारुख के साथ गायन करने लगे। इन्होंने उमर फारुख के साथ एक टीवी चैनल पर इंडियाज गॉट टैलेंट 2010 में भाग लिया और गायन किया।

ये अब तक पर्यटन, कला व संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में दर्जनों बार अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। ये देश के प्रतिष्ठित मंचों पर अलवर की भपंग वाद के साथ जुगलबंदी के साथ जब गाते हैं तो श्रोता तालियां बजाने पर मजबूर हो जाते है। इन्हें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव में सम्मानित किया गया। इनका कहना है कि वर्तमान में कई संचार साधनों से नए-नए कलाकारों की योग्यता सामने आ रही है जिसके कारण नए कलाकारों का संघर्ष कम हो गया है। अलवर संस्कृति, कला व अध्यात्म की दृष्टि से पूर्ण जिला है। यहां पर्यटन के क्षेत्र में विकास होगा

तो यहां सभी को लाभ होगा।

ख्यामि नाम भपंग वादक युसूफ खान का कहना है कि जब भपंग के साथ कव्वाल असलम भारती कव्वाली गाते हैं तो उसे खूब पसंद किया जाता है। ये अब हमारे अलवर की शान बन गए हैं। जब असलम भारती उमर फारूख के साथ उनका प्रसिद्ध लोकगीत टर्र गाते थे तो श्रोता हंस-हंसकर लोटपोट हो जाते थे। अलवर मे असलम की आवाज को खूब पसंद किया जाता है। असलम कई तरह की आवाज निकालते हैं।