
अलवर. देश की राजधानी दिल्ली व प्रदेश की राजधानी जयपुर के बीच में बसे अलवर में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। एनसीआर में शामिल व प्रदेश सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने वाले अलवर में एक कमरे में विवि चल रहा है तो दो साल से करोड़ों का मेडिकल कॉलेज ताले में बंद है। सरिस्का को लोग चट्ट करने में लगे हैं व वन्यजीवों पर शिकारियों का खतरा मंडरा रहा है। कई सरकारें आई लेकिन आज तक लोगों को चम्बल का पानी नहीं मिला। औद्योगिक इकाइयां पर्यावरण को चुनौती दे रही हैं। जिला मानों गुटखे की राजधानी बन चुका है। अवैध खनन में जिले की कई बार बदनामी हो चुकी है। शिक्षा के नाम पर मिला एक कमरे का विवि, तो ताले में मेडिकल कॉलेज बंद
कई सरकारें आई लेकिन चम्बल का पानी नहीं मिला, सरिस्का को चट्ट कर रहे लोग।
जिले की प्रमुख समस्याएं
जिले में खुलेआम अवैध खनन होता है। खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद है कि वो आए दिन पुलिस व खनन विभाग के अधिकारियों पर फायरिंग करते हैं। कुछ माह पहले शहर के नजदीक अवैध खनन में विस्फोट के दौरान एक युवक की मौत हो गई थी।
गुटखे की ज्यादातर औद्योगिक इकाई अलवर में हैं। अलवर से गुटखा देशभर में सप्लाई होता है। युवा गुटखे की चपेट में आ रहे हैं।
कई सालों बाद जिले में विवि शुरू हुआ, लेकिन वो केवल एक कमरे में चल रहा है। उसमें संसाधनों का अभाव है।
दो साल से 800 करोड़ का मेडिकल कॉलेज ताले में बंद हैं।
चम्बल से पानी लाने के लिए दो बार सर्वे हो चुका है व एक बार 5000 करोड़ रुपए की डीपीआर भी बन चुकी है। इसमें एक बार बदलाव भी हुआ। लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। प्रत्येक सरकार चम्बल से पानी लाने की घोषणा करती है, जो आज तक पूरी नहीं हुई है।
देश विदेश में विख्यात सरिस्का को लोग चट्ट करने में लगे हैं। शिकारियों के आए दिन शिकार करने की शिकायत मिलती है, तो वन क्षेत्र में अवैध निर्माण हो रहे हैं।
शहर में एवं जिले में आधारभूत संरचना कमजोर
Published on:
25 Jan 2018 02:37 pm
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