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अब नेताओं को सरकारी गाड़ी इतने दिन मिलेगी

प्रदेशभर की जिला परिषदों के प्रमुख साल में 240 व उप जिला प्रमुख 30 दिन ही सरकारी वाहन का प्रयोग कर सकते हैं। ये जवाब जिला परिषद ने विधानसभा के आठवें सत्र में अजमेर के नसीराबाद विधायक रामस्वरूप लांबा की ओर से पूछे गए सवाल पर दिया है। जैसे ही ये जवाब मिला तो सरकार ने जनप्रतिनिधियों के सरकारी वाहन के प्रयोग की पूरी जानकारी वेबसाइट पर डाली है ताकि सभी को पता हो सके।

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अलवर

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susheel kumar

Mar 19, 2024

अब नेताओं को सरकारी गाड़ी इतने दिन मिलेगी

अब नेताओं को सरकारी गाड़ी इतने दिन मिलेगी

प्रदेशभर की जिला परिषदों के प्रमुख साल में 240 व उप जिला प्रमुख 30 दिन ही सरकारी वाहन का प्रयोग कर सकते हैं। ये जवाब जिला परिषद ने विधानसभा के आठवें सत्र में अजमेर के नसीराबाद विधायक रामस्वरूप लांबा की ओर से पूछे गए सवाल पर दिया है। जैसे ही ये जवाब मिला तो सरकार ने जनप्रतिनिधियों के सरकारी वाहन के प्रयोग की पूरी जानकारी वेबसाइट पर डाली है ताकि सभी को पता हो सके।

पीए रखने का भी नहीं है प्रावधान
सवाल ये भी उठाया गया था कि जिला प्रमुखों को पीए रखने का प्रावधान है या नहीं, इसके जवाब में परिषद ने कहा है कि पीए नहीं रख सकते। कनिष्ठ लिपिक की सेवाएं बतौर निजी सहायक उपलब्ध कराने का कोई प्रावधान नहीं है। अलवर की िस्थति के बारे में बताया है कि वर्तमान में दो लिपिक प्रमुख कार्यालय में पत्रावलियों के संधारण के लिए लगाए गए हैं। निजी राशि खर्च का भी जवाब दिया गया।

एक साल में निजी आय के 28 लाख खर्च किए
विधानसभा की साइट पर अपलोड सूचना के अनुसार जिला परिषद ने अकेले वर्ष 2022-23 में परिषद की निजी आय से 28 लाख रुपए से ज्यादा की राशि खर्च की है। इसमें 8 लाख से ज्यादा की राशि तो एक साल में एक वाहन के संचालन और संधारण पर ही खर्च की गई है। इसके अलावा 8 लाख से ज्यादा की राशि चौकीदारों और सुरक्षाकर्मियों पर, ढाई लाख रुपए कोर्ट केस के खर्चों पर, दो लाख रुपए चाय नाश्ते पर खर्च किए गए।पिछले दो सालों में परिषद ने निजी आय से 70 लाख रुपए खर्च किए।

इनको भी मिलती है सरकारी वाहन की सुविधा
जिला परिषद के सदस्य और स्थाई समिति के अध्यक्षों को वर्ष में 15 दिन, पंचायत समिति के प्रधान को वर्ष में 120 दिन, पंचायत समिति के उप प्रधान को वर्ष में 15 दिन और पंचायत समिति के सदस्य और अध्यक्ष स्थाई समिति को वर्ष में 6 दिन सरकारी वाहन दिए जाने का प्रावधान है लेकिन यहां हकीकत ये है कि कई जनप्रतिनिधियों को वाहनों की सुविधा ही नहीं मिल पा रही है।