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गोविंदगढ़ किले की जमीन पर सरकारी कार्यालय के आवंटन का किया विरोध

ज्ञापन सौंपा,आंदोलन की दी चेतावनी

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गोविंदगढ़ किले की जमीन पर सरकारी कार्यालय के आवंटन का किया विरोध

अलवर. गोविंदगढ़ नगरपालिका के सामने नारेबाजी करते कस्बेवासी।


अलवर. गोविन्दगढ़ कस्बे में किला बचाओ संघर्ष समिति ने बुधवार को किले की जमीन पर सरकारी कार्यालय के आवंटन करने के विरोध में गोविंदगढ़ नगर पालिका के कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान समिति सदस्यों ने नारेबाजी भी की।
गोविंदगढ़ नगर पालिका के कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में अशोक गुगनानी, पार्षद मधु खंडेलवाल, सुमन मेघवाल ने अवगत कराया कि लगातार विरोध के बाद भी नगर पालिका की ओर से किले की जमीन पर सरकारी कार्यालयों के लिए भूमि आवंटन की जा रही है, जो कस्बे की एकमात्र धरोहर है। यदि उसे भी नष्ट कर दिया जाएगा तो ऐतिहासिक धरोहर नहीं बच पाएगी। किले में हजारों की तादाद में पक्षियों का बसेरा है जो भी नष्ट होने की कगार पर है। आमजन की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हुए जानबूझकर वहां पर नगर पालिका अधिशासी अधिकारी और नगर पालिका चेयरमैन की ओर से स्थानीय विधायक के दबाव में जमीन आवंटन की जा रही है जो कि सरासर गलत है। यदि जमीन के आवंटन को नहीं रोका गया तो शीघ्र ही आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में रोशन शर्मा, सुनील गर्ग, मीरा गोयल, सीमा गाबा, वीर कृष्ण अवस्ती, गंगा प्रसाद यादव,मोनू शर्मा, प्रीतम मेघवाल, हेमा शर्मा, सचिन शर्मा सहित क्षेत्रवासी भी मौजूद थे।
हस्ताक्षर अभियान भी चलाया
किला बचाओ संघर्ष समिति की ओर से हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। जिसमें क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों सहित एक हजार से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर करके किला बचाओ की मुहिम में जुड़े हैं।

आधा दर्जन से अधिक भवन खाली पडे
ज्ञापन में मीरा गोयल और सीमा गाबा ने बताया कि नगर पालिका परिषद क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक ऐसे सरकारी भवन है जोकि खंडहर अवस्था में है। जिन पर या तो अतिक्रमण किया जा रहा है या फिर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा दिन भर लगा रहता है। यदि वहां पर इन सरकारी कार्यालयों का संचालन किया जाए तो ऐतिहासिक धरोहर को बचाया जा सकता है और जर्जर अवस्था में जीर्ण शीर्ण हो चुके सरकारी कार्यालयों की भी दशा बदल सकती है