
राजस्थान में यहां स्थित है दुनिया में परियों का एकमात्र मंदिर, परियों के वरदान से दूर होती है यह बीमारी
परियों की कहानी सुनी होंगी, अलवर के खैरथल में एक ऐसा मन्दिर जहां परियों की होती है पूजा और मांगी जाती है मन्नत़े सैकड़ों साल पुरानी परियों की हवेली में है अपनी तरह का अनोखा मन्दिर खैरथल में है।
कहा जाता है परियों के वरदान से लोगो की पीड़ाएं दूर हो जाती है । बच्चो के रोग ठीक हो जाते है । खैरथल कस्बे की पुरानी आबादी खैरथल गांव में स्थित इस मंदिर को परी वाली हवेली औऱ परी माता का मंदिर के नाम से जाना जाता है ।इसे मानने वाले में सिर्फ हिन्दू ही नही मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल है । वे इसे परी बीबी की हवेली के नाम से जानते हंै और सिर झुकाने आते हैं।
मत्स्यांचल के अलावा दिल्ली ,मुम्बई ,कोलकाता जैसे दूर दराज के लोग हर साल हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन व जात देने आते है । लोगों की मान्यता है कि छोटे बच्चों को उल्टी दस्त सहित कई रोग माता मन्दिर में जात लगाने पर ठीक हो जाते है। शादी से ठीक पहले रिश्ते होते ही माताएं अपने बच्चों को जात देने यहाँ आते हैं। स्थानीय बंशीधर छंगाणी व हेमराज लोढा ने बताया कि वर्षों पूर्व लोगो को यहां चमत्कार लगा और मान्यता दूर दूर तक फैल गयी ।
वैशाख माह में ही लगता है मेला
वैशाख माह में शुक्ल पक्ष में बुधवार को परी माता के मंदिर पर मेला भरता है । जिसमे प्रत्येक बुधवार को करीब 25 हजार लोग आते है। परी माता मंदिर में वर्ष भर में आने वाले चढ़ावे से मन्दिर का संचालन होता है ।मन्दिर की पुजारिन मधु वासु ने बताया कि वे ही मन्दिर की देखरेख करती है । चढ़ावे में अनाज व नकदी आती है । इससे व्यवस्थाओ का संचालन किया जाता है । हवेली काफी पुरानी होने से जर्जर हो गई थी जिसे दो वर्ष पूर्व जीर्णोद्धार कराया गया है ।
परी माता के मंदिर में अल सुबह के समय बाहर से आने वाले लोगों की जात लगती है और शाम के समय स्थानीय लोगो की जात लगाने की मान्यता है । मेले में बाहर से आए श्रद्धालुओं को कोई तकलीफ ना हो इसे लेकर ही स्थानीय लोग सेवादार के रूप में तैनात हो जाते हैं। कई लोग छोटे बच्चों को पानी, दूध की व्यवस्था करते है ं।
Published on:
11 Oct 2018 05:32 pm
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