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आधुनिक जीवन शैली से बढ़ रहे अवसाद के रोगी, युवाओं की संख्या अधिक

अलवर. जीवन शैली में बदलाव के साथ ही अवसाद के रोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। हैरानी कि बात यह है कि अवसाद या डिप्रेशन के रोगियों में युवाओं की संख्या सर्वाधिक है। जानकारों के अनुसार असंयमित जीवन शैली, कॅरियर व विवाह की चिंता एवं पारिवारिक कारणों के चलते युवा निराशा के शिकार होकर अवसादग्रस्त हो रहे हैं। इसके कारण सामान्य चिकित्सालय में प्रतिदिन करीब 40 अवसाद के रोगी प्रतिदिन उपचार के लिए आ रहे हैं।

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आधुनिक जीवन शैली से बढ़ रहे अवसाद के रोगी, युवाओं की संख्या अधिक

आधुनिक जीवन शैली से बढ़ रहे अवसाद के रोगी, युवाओं की संख्या अधिक

आधुनिक जीवन शैली से बढ़ रहे अवसाद के रोगी, युवाओं की संख्या अधिक
-नशे की प्रवृति व गेजेट्स का अधिक प्रयोग से बना रहा मानसिक रोगी

अलवर. जीवन शैली में बदलाव के साथ ही अवसाद के रोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। हैरानी कि बात यह है कि अवसाद या डिप्रेशन के रोगियों में युवाओं की संख्या सर्वाधिक है। जानकारों के अनुसार असंयमित जीवन शैली, कॅरियर व विवाह की चिंता एवं पारिवारिक कारणों के चलते युवा निराशा के शिकार होकर अवसादग्रस्त हो रहे हैं। इसके कारण सामान्य चिकित्सालय में प्रतिदिन करीब 40 अवसाद के रोगी प्रतिदिन उपचार के लिए आ रहे हैं।

-असंयमित दिनचर्या से युवा हो रहे डिप्रेशन के शिकारजानकारों के अनुसार युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृति, खानपान का बदलाव, देर रात तक जागना व इलेक्ट्रिक गेजेट्स का अधिक प्रयोग उन्हें मानसिक रोगी बना रहा है। ऐसे में आत्मविश्वास की कमी से व्यक्ति निराश होकर अवसादग्रस्त हो जाता है।

-बीमारी के लक्षणमानसिक बीमारियां होने पर रोगी को देर रात तक नींद नहीं आती है। वह अकेले गुमसुम रहने लगता है। कभी-कभी व्यक्ति अधिक बोलने लगता है। इसके साथ ही चिड़चिड़ापन, बैचेन रहना व बात-बात पर गुस्सा हो जाना मानसिक रोगी के सामान्य लक्षण हैं।

बचाव के उपायविशेषज्ञों के अनुसार मानसिक रोग कई तरह के होते हैं। इनका कारण मुख्यत मस्तिष्क के रासायनिक बदलाव होना है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार हृदय रोगों के बाद सबसे अधिक मरीज मानसिक बीमारियों से ग्रसित है। मनोरोग से संबंधित बीमारियों वाले मरीजों को योग, व्यायाम व संयमित जीवन शैली अपनाने की जरुरत है। इसके साथ ही पीडि़त व्यक्ति मित्रों व परिवारजनों से बात करें, अच्छे पलों के बारे में सोचें, परिवार और बच्चों के बारे में सोचें और मनोचिकित्सक की सलाह लें।

& सकारात्म सोचें

अवसाद के रोगी को व्यस्त रहने की जरुरत है। योग व संयमित दिनचर्या अपनाकर मानसिक रोगों से बचा जा सकता है। अवसादग्रस्त व्यक्ति के परिवार के लोग रोगी को एकांत में अकेला नहीं छोड़ तथा उसका मन परिवर्तन करने का प्रयास करें। आवश्यक होने पर चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।-डॉ. महिपाल सिंह चौहान, वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञ, सामान्य चिकित्सालय।