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फोटो… गलफांस बने उल्टी के सैंपल… पुलिस है कि सुनती ही नहीं

जिला अस्पताल में जहर सेवन के मरीजों के उल्टी के सैंपल गलफांस बन गए हैं। अस्पताल प्रशासन पिछले चार साल से इन सैम्पल के निस्तारण के लिए पुलिस को रिमाइंडर भेज चुका है, लेकिन पुलिस जवाब नहीं दे रही है। हालत यह है कि इन सैम्पल से दो कमरे फुल हो चुके हैं।

अलवरJul 06, 2024 / 11:31 am

Umesh Sharma

अलवर. जिला अस्पताल में जहर सेवन के मरीजों के उल्टी के सैंपल गलफांस बन गए हैं। अस्पताल प्रशासन पिछले चार साल से इन सैम्पल के निस्तारण के लिए पुलिस को रिमाइंडर भेज चुका है, लेकिन पुलिस जवाब नहीं दे रही है। हालत यह है कि इन सैम्पल से दो कमरे फुल हो चुके हैं। अगर सैम्पलों का निस्तारण हो जाए तो इन कमरों को अन्य काम में उपयोग लिया जा सकेगा। उधर, लंबा समय बीतने की वजह से उल्टी के सैंपल सूख गए हैं और कई खराब हो चुके हैं। साल 2020 के बाद पुलिस की ओर से सैंपलों के निस्तारण के संबंध में अभी तक कोई जवाब भी नहीं दिया गया है।

समझे क्यों जरूरी है सैम्पल लेना

जहर सेवन के मामलों में पुलिस संबंधित मेडिकल ज्यूरिस्ट से फाइल मार्क करवाने के बाद माइनर ऑपरेशन थिएटर (एमओटी ) इंचार्ज से उल्टी के सैंपल प्राप्त करती है। जिसे मेडिकल ज्यूरिस्ट की ओर से सील लगाकर पुलिस को सौंपा जाता है। इसके बाद पुलिस की ओर से सैंपल की फोरेंसिक जांच के लिए अपने स्तर पर इसे जयपुर भिजवाया जाता है, लेकिन पुलिस की ओर से एक प्रतिशत से भी कम मामलों में ही अस्पताल सैंपल लिए जा रहे हैं। वो भी जहर के सेवन से किसी व्यक्ति की मौत के बाद मामला बढ़ने पर। बिना पुलिस की अनुमति के अस्पताल प्रशासन इन सैंपलों का खुद के स्तर पर निस्तारण भी नहीं कर सकता है। ऐसे में उल्टी के सैंपलों को सुरक्षित रखना अस्पताल प्रशासन के सिरदर्द बनता जा रहा है।
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हर साल करीब 800 केस

अस्पताल में हर साल जहर सेवन के करीब 800 केस आ रहे हैं। यहां मरीज के भर्ती होने पर चिकित्सक की सलाह पर तुरंत उसके पेट की सफाई की जाती है। इसमें मरीज को उल्टी कराकर जहर को पेट से बाहर निकाला जाता है। ताकि मरीज की जान बचाई जा सके। इसके साथ ही संबंधित थाना पुलिस को भी मरीज की सूचना तुरंत दी जाती है। जिससे मामले में कानूनी कार्रवाई हो सके। नियमानुसार ऐसे मामलों में यदि मरीज की मौत हो जाती है, तो पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ मृतक की उल्टी का सैंपल भी अस्पताल से हाथोंहाथ लेना होता है। यदि मरीज जीवित बच जाता तो भी पुलिस को अधिकतम 6 महीने की समय सीमा में अस्पताल से उस व्यक्ति की उल्टी का सैंपल लेना होता है।
फैक्ट फाइल:
महीना–जहर सेवन के मामले

जनवरी 63
फरवरी 45
मार्च 75
अप्रेल 78
मई 69
जून 79
(इस साल अभी जिला अस्पताल में आए जहर सेवन के केस )

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