
चार बावड़ी चौरासी कुआं के नाम से है पिनान कस्बे की पहचान,चार बावड़ी चौरासी कुआं के नाम से है पिनान कस्बे की पहचान
अलवर. चार बावड़ी चौरासी कुआं के नाम से प्रसिद्ध है अलवर जिले का पिनान कस्बा। यह कस्बा संतों की तपोभूमि रही है।
विरासतकालीन में पिण्ड नामक राजा ने गांव के मध्य चतुर्भुज महाराज के मंदिर व एक कुआं की स्थापना कर पिण्डायन नाम से गांव बसाया था। विरासत के अधीन ऊंचाई पर बसे गांव में सर्राफा की दुकानें उस जमाने का शहर माना जाता था, जो आज भी खुदाई के दौरान निकलने वाले पौराणिक अवशेष विरासत की याद दिलाते हैं।
जनश्रुतियों के अनुसार विरासत अधीन गांव में मनसा सेठ (साहूकार) नामक व्यक्ति की गाथा राजाओं के राज में चर्चित रही थी। कहा जाता है कि जयपुर (आमेर) के महाराजा रहे मानसिंह के राज्य में एक बार अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। राजा ने विरासत के अधीन सेठ साहूकारों को ऐलान कर राज दरबार में हाजिर होने का फरमान भेजा। फरमान पिनान के मनसा सेठ को भी भेजा गया। दरबार में पहुंचे सेठ साहूकारों के समक्ष राजा ने फरमान किया कि राज्य में अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गई है। मेरे राज्य में ऐसा कोई सेठ साहूकार है जो प्रजा की हिफाजत को तैयार हो। दरबार में उपस्थित सेठ साहूकारों ने अपनी अपनी अहमियत के अनुसार दान देने का ऐलान किया, लेकिन मनसा सेठ ने राजा के सामने हार नहीं मानी और राजा के समक्ष गरीबी जैसे हालातों में खड़े होकर कहा कि राज्य में जितने संसाधन राजा के पास हो उन्हें मेरे यहां भेज देना। महान सेठ की बात सुनकर राजा गर्व से फूला नहीं समाया और कहा कि जब तक हमारे राज्य में ऐसे दानी सेठ साहूकार रहेंगे तो प्रजा कदापि भूखी नहीं रहेगी। कहा जाता है कि उस जमाने में संसाधनों में छकड़ा गाडिय़ां हुआ करती थी। राजा ने सेठ के अनुसार जयपुर से पिनान तक छकड़ा गाडिय़ों का लबाजमा खड़ा कर दिया। सेठ ने सभी गाडिय़ों में एक ही छापे की अशर्फियां लदान करा दी। राजा खुश हुआ। मान सम्मान में मनसा सेठ को दरबार में बुलाया गया। राजा ने सेठ से ईनाम मांगने की बात कही। जिस पर साहूकार ने नृत्यांगन में नाच रही नर्तकी को ईनाम में मांग लिया।
घट गया लक्ष्मी का प्रभाव
घर में आई नर्तकी के कारण साहूकार का वैभव पलटता गया और लक्ष्मी का प्रभाव घटता गया। शनै: शनै: बदलते वैभव के चलते मनसा सेठ ने एक ऐसे कुएं का निर्माण कराया, जिसकी सुरंग उसके घर तक पहुंचती है। जो वर्तमान में पिनान में बना महराबदार कुआं बड़ाकुआं के नाम जाना जाता है। कलात्मक और सौन्दर्य की छटा बिखेरता कुआं आज भी धरातल पर अपनी आभा तरस खाता मौजूद है तथा सेठ मनसा के वंशज भी मौजूद है।
Published on:
19 Oct 2022 02:14 am

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