
अलवर. शहरी एरिया में हरियाली बढ़ाने के लिए मास्टर प्लान में ग्रीनबेल्ट आरक्षित की गई, लेकिन 15 से अधिक एरिया में इन जमीनों पर कब्जे हैं। कहीं पर आबादी निवास कर रही है, तो कहीं पर अन्य तरह के अतिक्रमण हैं। यूआइटी ने प्रशासन को यह रिपोर्ट सौंपी है। अब प्रशासन के आदेश पर ही यूआइटी एक्शन प्लान बना रही है। जोन अनुसार कार्रवाई होगी, जिससे भू-माफिया या संबंधित लोगों में हड़कंप मचा है।
इस तरह कराया गया सर्वे
दीवानजी का बाग की 9 बीघा जमीन मास्टर प्लान में ग्रीनबेल्ट के नाम दर्ज है, जिस पर प्लॉटिंग कर पट्टे जारी कर दिए गए। राजस्थान पत्रिका ने यह मामला उठाया, तो सभी पट्टे निरस्त किए गए और अब भू-रूपांतरण निरस्त करने की तैयारी है। इस प्रकरण के बाद जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला ने यूआइटी से ऐसी जमीनों का सर्वे करवाया, जहां ग्रीनबेल्ट पर कब्जे हो गए या फिर अन्य प्रयोजन हो रहा है। यूआइटी ने 15 दिन में सर्वे कराया। पांच जोन में 95 एरिया सर्वे के दायरे में आया, जिसमें 15 एरिया में अलग-अलग खसरों में आबादी बस गई। पहाड़ी एरिया में जहां हरियाली बढ़नी थी, आबादी वहां तक पहुंच गई। कुछ जगहों पर बिल्डरों ने एरिया विकसित किया, जिससे उनमें हड़कंप मचा है।
यहां ग्रीनबेल्ट में आबादी बसी
-जोन बी के लिवारी एरिया के खसरा नंबर 780 का भू-उपयोग रीजनल पार्क है, लेकिन यहां पहाड़ी पर आबादी है।
-इसी एरिया के खसरा नंबर 474 में भी पहाड़ व प्लांटेशन की जगह पहाड़ी आबादी है।
-सोनावा डूंगरी के खसरा नंबर 42/193 ग्रीनरी होनी थी, लेकिन यहां आबादी बस गई। इसी तरह चोर डूंगरी के खसरा नंबर 19, 42, 43 में ग्रीनरी की जगह आबादी बस गई।
-जोन-सी के बेलाका एरिया के खसरा नंबर 223, 224 में ग्रीनरी, तालाब की जगह आंशिक आबादी बस गई।
-देवखेड़ा के खसरा नंबर 30 पर ग्रीनरी व आवासीय लैंडयूज है, जिस पर आबादी हो गई।
-देसूला में नहरी जमीन खसरा संख्या 180, 181, 185 व 186 पर है। यहां ग्रीनरी की जगह आबादी बस गई।
-देसूला के खसरा संख्या 307 में भी ग्रीनरी की जगह आंशिक आबादी है।
-जोन डी में नगला समावदी के खसरा संख्या 348, 349 व 351 पर हरियाली होनी थी, लेकिन यहां आबादी निवास कर रही है।
Updated on:
15 Apr 2026 11:00 am
Published on:
15 Apr 2026 10:59 am
