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संत को दिया वचन, सदियों बाद भी माजरा काठ गांव नशा मुक्त

ग्रामीण तंबाकू को हाथ लगाना समझते है अभिशाप

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अलवर

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mohit bawaliya

May 31, 2023

संत को दिया वचन, सदियों बाद भी माजरा काठ गांव नशा मुक्त

संत को दिया वचन, सदियों बाद भी माजरा काठ गांव नशा मुक्त

नीमराणा. उपखंड क्षेत्र के ग्राम माजरा काठ के लोग कालांतर में सदियों पहले यहां के लोक देवता कहलाए बाबा भगवान दास को दिए नशा मुक्ति का वचन आज भी निभा रहे है। माजरा काठ ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों के ग्रामीण भी इस वचन में बंधे है और हुक्का, बीड़ी, सिगरेट व तंबाकू का कोई सेवन नहीं करते है। ग्रामीणों की माने तो यहां के लोग नशे की वस्तु को हाथ लगाना भी अभिशाप समझते है।
इस विषय से गांव के बीच में बनी बाबा की गंगा कुई व मंदिर भी खूब वास्ता रखता है। ग्रामीण बताते है माजरा काठ के बीच एक कुआं है,जिसे यहां के वाङ्क्षशदे गंगा वाला कुआं व लोक देवता संत बाबा भगवान दास के नाम से जानते है व पूजते है। बताया जाता है कि बाबा ने अपने काल में ग्रामीणों से हुक्का, बीड़ी,सिगरेट व तंबाकू का त्याग रखने का वचन लिया था। तब से उस वचन को ग्रामीण निभाते आ रहे है। ग्रामीण विजय ङ्क्षसह ओला, विशेषर चौधरी, राजीव,संदीप आदि बताते है हमारे पूर्वजों ने नशा नहीं करने का बाबा को दिए वचन को कोई भी तोड़ता है तो उसके साथ कोई ना कोई अनर्थ होता है। बतौर ग्रामीण कुछ वर्षों से पहले तक गांव के लोग शराब से भी परहेज रखते थे,लेकिन आज की युवा पीढ़ी में इसका प्रचलन देखने को मिल रहा है। माजरा काठ के साथ-साथ सानोली,जाट बहरोड़,अहीर भगोला व आधा पोलादपुर जैसे गाँवो में लोगों हुक्का,बीड़ी,सिगरेट व तंबाकू का सेवन बंद है।
खास है कार्तिक पूर्णिमा की रात: बुजुर्ग ऐसा बताते हैं कि कालांतर में एक बार वृद्ध हो चुके गंगा उपासक संत बाबा भगवान दास तपस्या के दौरान पैदल गंगा स्नान के लिए गंगा धाम निकल गए। वृद्धवस्था के कारण वे मुश्किल से गंगा पाल ही पहुंच पाए तो उन्होंने गंगा मैया से प्रार्थना की। तब गंगा मैया ने बाबा की आस्था से खुश होकर वरदान दिया था कि तुम मुझे याद करना और गांव में एक कुआं खोदना मैं वहां प्रकट होउंगी। तो बाबा बोले मैं कैसे मानूगा की जाहं कुआं खोदूँगा वहां आप ही प्रकट होंगी। ऐसे में गंगा मैया ने आशीर्वाद दिया कि तुम्हारे कुंडी सोटे यहां छोड़ जाओ कुएं में मेरे जल के साथ ये वहीं मिलेंगे। संत ने ऐसा ही किया और गंगा मैया ने उनकी मुराद उसी तरह पूरी की। जहां कुआं खोदा वंहा तल में जल के साथ बाबा के कुंडी सोटे मिले। तब से वह कुआं गंगा वाला कुआं कहलाता है। लोगो की उसके प्रति गहरी आस्था है।

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